मंत्रालय का कड़ा खंडन
वित्त मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी किए गए एक बयान में उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया गया जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार मंदिर के सोने को सरकारी योजनाओं में इस्तेमाल करने की सोच रही है। मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही इन अटकलों में यह भी कहा जा रहा था कि मंदिरों को उनके सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड (Gold Bonds) दिए जा सकते हैं या फिर मंदिर के सोने को देश के स्ट्रेटेजिक रिजर्व (Strategic Reserves) का हिस्सा बनाया जा सकता है। मंत्रालय ने साफ किया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार का यह कदम जनता के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करने के लिए उठाया गया है, और लोगों को केवल आधिकारिक सरकारी संचार पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।
अटकलों के पीछे की वजह: आर्थिक दबाव
यह सफाई ऐसे समय पर आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सोने की खरीदारी और विदेशी यात्राओं को टालने की अपील की है। इसका मुख्य मकसद पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से अक्सर सोने जैसी कमोडिटीज के दाम में उतार-चढ़ाव आता है, जो भारत की इंपोर्ट बिल (Import Bill) पर असर डाल सकता है और रुपये पर दबाव बना सकता है। भारत, जो सोने का एक बड़ा आयातक (Importer) है, इन वैश्विक उथल-पुथल से काफी प्रभावित होता है। हाल के दिनों में, भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में हल्की गिरावट देखी गई है, जिसका एक कारण इंपोर्ट पेमेंट (Import Payments) और रुपये को संभालने के उपाय रहे हैं।
सोने से जुड़ी पुरानी सरकारी योजनाएं
भारत सरकार ने पहले भी सोने के प्रबंधन के लिए कई योजनाएं लाई हैं। इनमें साल 2015 में शुरू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetisation Scheme - GMS) भी शामिल थी, जिसका मकसद घरों में रखे बेकार सोने को उत्पादक कामों में लगाना था। हालांकि, इन योजनाओं को जनता से अपेक्षा के अनुरूप समर्थन नहीं मिला था और लक्ष्य से काफी कम सोना ही जुटाया जा सका था। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने पहले भी कहा है कि प्रधानमंत्री की इस अपील का रत्न और आभूषण उद्योग पर अल्पकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे मांग में गिरावट आ सकती है।
आगे का रास्ता: आर्थिक प्राथमिकताएं
सरकार का मुख्य ध्यान अब देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बनाए रखने और पश्चिम एशिया संकट के व्यापक आर्थिक प्रभावों पर रहेगा। हालांकि मंत्रालय ने मंदिर के सोने को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, लेकिन उद्योग और निवेशक आर्थिक नीतियों से जुड़े आधिकारिक बयानों पर बारीकी से नजर रखेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार की मौजूदा प्राथमिकता आयात को नियंत्रित करना और पारंपरिक वित्तीय साधनों के माध्यम से घरेलू बचत को प्रोत्साहित करना ही रहेगा।