वित्त मंत्रालय ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी एक्सपोर्ट पर मिलने वाले ड्यूटी ड्रॉबैक रेट्स में कटौती की है। जुलाई में की गई भारी बढ़ोतरी के बाद सरकार का यह कदम एक्सपोर्टर्स के लिए लागत बढ़ा सकता है और उनके मुनाफे पर दबाव डाल सकता है।
वित्त मंत्रालय ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी एक्सपोर्ट पर मिलने वाले 'ड्यूटी ड्रॉबैक' (Duty Drawback) रेट्स को कम कर दिया है। यह फैसला जुलाई में किए गए उस बदलाव को पलटने जैसा है, जिसमें सरकार ने एक्सपोर्टर्स को राहत देते हुए रेट्स में काफी बढ़ोतरी की थी।
ड्यूटी ड्रॉबैक का गणित
आसान भाषा में समझें तो, ड्यूटी ड्रॉबैक वह रिफंड है जो सरकार एक्सपोर्टर्स को कच्चे माल पर दिए गए कस्टम ड्यूटी के बदले देती है। चूँकि भारत अपनी गोल्ड और सिल्वर की अधिकांश जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए यह रिफंड कंपनियों के लिए लागत कम करने का बड़ा जरिया होता है।
नए आदेश के मुताबिक:
- गोल्ड ज्वेलरी: एक्सपोर्ट इंसेंटिव अब ₹1,851.99 से घटकर ₹1,794.11 प्रति ग्राम रह गया है, जो कि 3.1% की सीधी कटौती है।
- सिल्वर ज्वेलरी: यहाँ कटौती और भी गहरी है। रेट्स को ₹29,501.09 प्रति किलोग्राम से घटाकर ₹26,859.02 कर दिया गया है, यानी इसमें लगभग 9% की गिरावट आई है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
यह फैसला उन कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण है जिनका बिजनेस बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट पर टिका है। Rajesh Exports जैसी कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर इसका दबाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि अब उन्हें अपने कामकाज के लिए ज्यादा लागत वहन करनी होगी।
वहीं, Titan या Kalyan Jewellers जैसे बड़े रिटेलर्स पर इसका असर कम होगा, क्योंकि इनका मुख्य ध्यान घरेलू बाजार पर रहता है। अब देखना यह होगा कि आने वाली तिमाही के नतीजों में कंपनियां इसे कैसे मैनेज करती हैं और क्या वे लागत बढ़ने के बाद भी अपने एक्सपोर्ट वॉल्यूम को बनाए रख पाती हैं या नहीं।
