Department of Food and Public Distribution ने शुगर मिलों में स्टॉक की फिजिकल ऑडिट शुरू करने का ऐलान किया है। 9 अक्टूबर, 2026 से शुरू हो रहे इस एक्शन के पीछे GST फाइलिंग और बिक्री के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया है।
फिजिकल ऑडिट क्यों जरूरी?
अगस्त 2026 के दौरान शुगर मिलों की GST फाइलिंग और सेल्स वॉल्यूम में काफी अंतर देखने को मिला था। सरकार अब 9 अक्टूबर से देशभर में फिजिकल वेरिफिकेशन शुरू कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मिलें कोई माल दबाकर (Hoarding) नहीं रख रही हैं और सप्लाई चेन डेटा के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा रही है।
नए सप्लाई और इन्वेंट्री नियम
त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए सरकार ने नियम और सख्त कर दिए हैं।
- सेल्स कोटा: अब मिलों को अपने पाक्षिक (fortnightly) कोटा का कम से कम 45% हिस्सा पहले हफ्ते में ही बेचना अनिवार्य होगा।
- डीलर लिमिट: 15 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 के बीच डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 1,000 क्विंटल तय कर दी गई है।
शुगर कंपनियों पर क्या होगा असर?
सरकार ने Essential Commodities Act, 1955 और Sugar Control Order, 2025 के तहत जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई है। अगर किसी कंपनी के आंकड़ों में गड़बड़ी पाई जाती है, तो उन्हें भविष्य में डोमेस्टिक सेल्स कोटा मिलने पर रोक लग सकती है।
निवेशकों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि इन कड़े नियमों के चलते कंपनियों के ऑपरेशनल कामकाज पर दबाव बढ़ेगा। कंपनियों को अब अपने डिस्पैच रिकॉर्ड और GST फाइलिंग का एकदम सटीक मिलान करना होगा। इस सख्ती के कारण आने वाले पीक सीजन में मार्जिन पर भी असर पड़ने की पूरी आशंका है, इसलिए निवेशकों को मैनेजमेंट की कॉमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए।
