Gold Price: बड़ी खरीदारी के संकेत! सोने में बन रहा है 'Buy on Dips' का मौका

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold Price: बड़ी खरीदारी के संकेत! सोने में बन रहा है 'Buy on Dips' का मौका
Overview

बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने के दाम स्थिर बने हुए हैं, जो हर महीने एक नया हाई लो बना रहे हैं। यह ट्रेंड बड़े निवेशकों की खरीदारी की ओर इशारा करता है, जो 'डिप पर खरीदें' की रणनीति अपना रहे हैं।

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सोने में क्यों दिख रही है तेजी?

सोने की कीमतों में लगातार हर महीने ऊंचे लो (Higher Lows) का बनना बाजार की मजबूती को दर्शाता है। इसका मतलब है कि जब भी कीमतों में गिरावट आ रही है, निवेशक तेजी से खरीदारी कर रहे हैं। यह 'अक्यूमुलेशन' यानी जमाखोरी का साफ संकेत है, जिससे पता चलता है कि बड़े निवेशक रणनीतिक रूप से सोने की होल्डिंग बढ़ा रहे हैं।

'डिप पर खरीदें' की रणनीति

बोनन्ज़ा (Bonanza) के कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव कहते हैं कि बाजार का टेक्निकल सेटअप 'करेक्शन पर खरीदने' की रणनीति का पुरजोर समर्थन करता है। कीमतों में गिरावट आते ही खरीदारी में तेजी आ जाती है, जो अक्यूमुलेशन का क्लासिक संकेत है। इससे यह साबित होता है कि बड़े निवेशक कीमतों में कमजोरी आने पर ही अपना सोना बढ़ा रहे हैं। भारत में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में मासिक लो में यह तेजी देखी जा सकती है: दिसंबर 2025 की शुरुआत में ₹1,27,036 से बढ़कर जनवरी 2026 तक ₹1,33,012 हुआ, और फिर फरवरी 2026 की शुरुआत तक 12.03% बढ़कर ₹1,49,015 पर पहुंच गया। मार्च 2026 के अंत में डॉलर के मजबूत होने और प्रॉफिट-टेकिंग के कारण थोड़ी गिरावट आई, लेकिन कीमतें फिर संभल गईं और मई 2026 की शुरुआत तक सपोर्ट लेवल 0.9% बढ़कर ₹1,47,127 हो गया।

इकोनॉमिक फैक्टर्स का असर

2026 की शुरुआत में, सोने की कीमतों पर टैरिफ विवादों, यूएस फेडरल रिजर्व की नीतियों, कमजोर होते डॉलर, केंद्रीय बैंकों की बड़ी खरीदारी और गोल्ड-ईटीएफ (Gold ETFs) में आए इनफ्लो का असर रहा। इन सब के साथ-साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने भी सोने को एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर और मजबूत किया। ऑगमांट बुलियन (Augmont Bullion) की एक रिपोर्ट भी इस बुलिश सेंटीमेंट की पुष्टि करती है, जिसमें कहा गया है कि $4,300 के ऊपर हायर-हाई (Higher Highs) या हायर-लो (Higher Lows) का स्ट्रक्चर बरकरार है। यह बताता है कि बाजार में आने वाली गिरावटें एक लंबे बुल मार्केट के भीतर री-अक्यूमुलेशन का हिस्सा हैं।

जोखिम और संभावित गिरावट

इस अक्यूमुलेशन ट्रेंड के बावजूद, बाजार में काफी ज्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। मार्च 2026 की गिरावट, जो डॉलर की मजबूती और प्रॉफिट-टेकिंग के कारण आई थी, अचानक बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना को दर्शाती है। जो निवेशक डिप पर खरीदने में अनुशासित नहीं हैं, वे बढ़ती कीमतों के पीछे भाग सकते हैं या गिरावट के दौरान पैनिक में बिकवाली कर सकते हैं। भू-राजनीतिक तनाव पर सुरक्षित निवेश की मांग निर्भर रहना भी अनिश्चित है; अगर वैश्विक संघर्ष कम होते हैं, तो यह सोने के लिए एक प्रमुख तेजी का कारक हट सकता है। इसके अलावा, डॉलर का लगातार मजबूत रहना भी सोने के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है।

आगे की रणनीति

एक्सपर्ट्स की सलाह है कि कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे सोने में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए, खासकर तब जब हर महीने ऊंचे लो का यह पैटर्न जारी रहे और सोना अपने लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहे। यह रणनीति किसी ऊंचाई पर एंट्री करने से बचने में मदद करती है और संभावित रूप से लंबे गोल्ड बुल मार्केट के भीतर रणनीतिक अक्यूमुलेशन की अनुमति देती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.