स्ट्रक्चरल बदलाव: 'सेफ-हेवन' से बढ़कर पोर्टफोलियो का हिस्सा
सोने की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी अब सिर्फ भू-राजनीतिक चिंताओं से ऊपर उठकर एक गहरे, स्ट्रक्चरल बदलाव का संकेत दे रही है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपनी रणनीति बदल रहे हैं और खासकर डॉलर एसेट्स से दूरी बनाकर अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला रहे हैं। इसके चलते वे ऐतिहासिक स्तर पर सोना खरीद रहे हैं। 2025 में ही सेंट्रल बैंकों ने कुल मिलाकर करीब 863 टन सोना खरीदा, और यह ट्रेंड 2026 तक जारी रहने की उम्मीद है।
ईटीएफ (ETFs) में रिकॉर्ड निवेश
इसी रणनीतिक बदलाव के साथ, गोल्ड-ईटीएफ (Gold ETFs) में भी बड़ा निवेश हुआ है। जनवरी 2026 में ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ में $19 बिलियन का रिकॉर्ड इनफ्लो देखा गया, जिससे मैनेजमेंट के तहत एसेट्स $669 बिलियन के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए। यह दिखाता है कि सोना अब सिर्फ 'सेफ-हेवन' (safe-haven) नहीं, बल्कि इंस्टीट्यूशनल पोर्टफोलियो का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। इसकी वजह सॉवरेन डेट (sovereign debt) और डॉलर की अस्थिरता को लेकर बढ़ी चिंताएं हैं।
भू-राजनीतिक घटनाओं और करेंसी का असर
हालांकि, असली डिमांड मजबूत हो रही है, लेकिन तात्कालिक कीमतें भू-राजनीतिक घटनाओं और करेंसी में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं। अमेरिका-ईरान बातचीत जैसे नए ट्रेड टेंशन और वैश्विक अनिश्चितताएं जोखिम से बचने की भावना को बढ़ा रही हैं, जिससे सोने की मांग बढ़ रही है। 23 फरवरी, 2026 को Comex गोल्ड $5,160-$5,200 प्रति औंस के आसपास था, जबकि MCX फ्यूचर्स करीब ₹1,59,420 प्रति 10 ग्राम पर थे। डॉलर का प्रदर्शन भी अहम है, हालांकि डी-डॉलरआइजेशन (de-dollarization) के बढ़ते ट्रेंड से डॉलर कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सहारा मिलेगा। मार्केट फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के मिनट्स का भी इंतज़ार कर रहा है, ताकि इंटरेस्ट रेट के भविष्य के रास्तों का पता चल सके, जो सोने की 'अवसर लागत' (opportunity cost) को काफी प्रभावित करते हैं।
भविष्य के अनुमान: $6000 तक का लक्ष्य?
बड़े फाइनेंसियल संस्थान 2026 के लिए सोने के प्रति बुलिश (bullish) बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि कीमतें $5,400 से लेकर $6,300 प्रति औंस तक जा सकती हैं। JP Morgan का मानना है कि 2026 के अंत तक कीमतें $5,000 प्रति औंस के करीब पहुंच सकती हैं, और $6,000 प्रति औंस तक जाने की भी पूरी संभावना है। Goldman Sachs ने 2026 के अंत के लिए अपना टारगेट $5,400 किया है, जो लगातार सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर आधारित है। ANZ ने 2026 की दूसरी तिमाही के लिए अनुमान $5,800 प्रति औंस कर दिया है, जो निवेश की मजबूत मांग को दिखाता है। महंगाई से बचाव, रणनीतिक रिजर्व में विविधता और कम रियल इंटरेस्ट रेट जैसे कारण सोने की कीमतों में यह बढ़ोतरी साइक्लिकल (cyclical) नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल (structural) बता रहे हैं।
जोखिम और चुनौतियाँ
इतनी पॉजिटिव तस्वीर के बावजूद, इन रिकॉर्ड स्तरों पर सोने की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव (volatility) बना रह सकता है। अगर भू-राजनीतिक संघर्ष अचानक कम हो जाते हैं या फेडरल रिजर्व का रुख अचानक हॉकिश (hawkish) हो जाता है, तो कीमतों में बड़ी प्रॉफिट-टेकिंग (profit-taking) हो सकती है। सिल्वर (Silver) में औद्योगिक मांग के कारण ज़्यादा विस्फोटक रैलियां देखी गई हैं, लेकिन इसकी ज़्यादा वोलेटिलिटी (volatility) और इकोनॉमिक स्लोडाउन (economic slowdown) के प्रति संवेदनशीलता सोने से ज़्यादा जोखिम भरी है। विश्लेषक चेता रहे हैं कि भले ही सोने के लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स (long-term fundamentals) मज़बूत हैं, लेकिन कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
आगे का नज़रिया
2026 में सोने की मजबूती बनी रहने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण मज़बूत स्ट्रक्चरल डिमांड ड्राइवर हैं। सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, ईटीएफ (ETF) में बड़ा निवेश और आसान मौद्रिक नीति (accommodative monetary policy) कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बनाए रखेगी। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाओं और फेडरल रिजर्व के संकेतों के प्रति मार्केट की संवेदनशीलता को देखते हुए, कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की उम्मीद की जानी चाहिए। निवेशक लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल ताकतों के मुकाबले शॉर्ट-टर्म गिरावट की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं।
