Goldman Sachs की चेतावनी: फारस की खाड़ी में तनाव बढ़ा तो Brent Crude ₹120 के पार!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Goldman Sachs की चेतावनी: फारस की खाड़ी में तनाव बढ़ा तो Brent Crude ₹120 के पार!

Goldman Sachs ने आगाह किया है कि अगर साल 2026 के अंत तक फारस की खाड़ी के होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह बाधित रहता है, तो ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) **$120** प्रति बैरल के पार जा सकता है। बैंक की मुख्य भविष्यवाणी **$80** प्रति बैरल की है, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) से ऊर्जा की कीमतों में बड़ी उछाल का जोखिम है।

Detailed Coverage

कच्चे तेल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी

विश्लेषकों ने बताया है कि साल 2026 की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। यह अनुमान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित बाधाओं पर आधारित है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। बैंक का मुख्य अनुमान $80 प्रति बैरल का है, जो इस उम्मीद पर आधारित है कि क्षेत्रीय संघर्ष कम होंगे। हालांकि, पश्चिम एशिया में लगातार अस्थिरता के कारण जोखिम ऊपर की ओर झुका हुआ है।

बाजार पर पड़ेगा असर?

ऊर्जा बाजार (Energy Markets) फारस की खाड़ी से गुजरने वाले तेल की मात्रा पर कड़ी नजर रख रहा है, जो संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर से 45% से नीचे गिर गया है। भू-राजनीतिक दबावों के साथ, ब्रेंट फ्यूचर्स (Brent Futures) हाल ही में लगभग $88.65 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इतिहास बताता है कि ये मार्ग कीमतों के प्रति संवेदनशील होते हैं; उदाहरण के लिए, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के दौरान अप्रैल के अंत में कच्चा तेल $126 के पार चला गया था।

ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

कच्चे तेल के अलावा, वैश्विक ऊर्जा बाजार अन्य आपूर्ति बाधाओं से भी जूझ रहा है। विश्लेषकों ने बताया है कि डीजल (Diesel) जैसे रिफाइंड उत्पादों का बाजार टाइट बना हुआ है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर हमले और गर्मी की लहरों जैसी मौसमी जोखिम शामिल हैं, जो परिचालन को बाधित कर सकते हैं। इन कारकों से प्लांट मेंटीनेंस में देरी होती है, जिससे ईंधन का उत्पादन और भी सीमित हो जाता है।

निवेशकों के लिए सुझाव

भू-राजनीतिक झटकों से चिंतित निवेशकों के लिए, बाजार विश्लेषकों ने दिसंबर 2026 और मार्च 2027 के बीच यूरोपीय डीजल टाइमस्प्रेड (European diesel timespread) जैसे एनर्जी-संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स की ओर इशारा किया है। यह रणनीति तब अपनाई जाती है जब प्रतिभागियों को उम्मीद होती है कि आपूर्ति में कमी अगले कुछ महीनों तक जारी रहेगी। हालांकि, तेल से जुड़े उत्पादों में किसी भी निवेश में अंतर्निहित जोखिम होता है, क्योंकि OPEC+ के उत्पादन कोटा या चीन और भारत जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मांग में बदलाव के आधार पर ऊर्जा की कीमतें तेजी से बदल सकती हैं।

आने वाले महीनों में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निगरानी होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल के पारगमन की वास्तविक मात्रा, लाल सागर (Red Sea) में शिपिंग सुरक्षा पर अपडेट और रूस में रिफाइनरी संचालन की स्थिति होगी। बाजार प्रतिभागी प्रमुख तेल उत्पादक देशों के उत्पादन स्तरों पर रुख में किसी भी बदलाव को भी देखेंगे, जो वर्तमान आपूर्ति दबावों को कम या बढ़ा सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.