ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर Goldman Sachs ने अपने अनुमान में बड़ा बदलाव किया है। सप्लाई चेन के रिस्क और जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता के चलते कंपनी ने Brent Crude का साल के अंत का टारगेट **$90** से बढ़ाकर **$105** प्रति बैरल कर दिया है।
ग्लोबल ऑयल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है। Goldman Sachs ने अपने लेटेस्ट अपडेट में Brent Crude के साल के अंत के टारगेट को $90 से बढ़ाकर $105 प्रति बैरल कर दिया है। वहीं, अमेरिका का बेंचमार्क WTI Crude भी अब $94 प्रति बैरल तक जाने का अनुमान है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
इस तेजी के पीछे मुख्य वजह सप्लाई चेन में संभावित रुकावटें और रिस्क प्रीमियम है। बैंक के एनालिस्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित टकराव ने मार्केट को अलर्ट पर डाल दिया है। इसके अलावा, यूक्रेन में चल रहा संघर्ष भी कीमतों को सपोर्ट दे रहा है। बैंक ने साल 2027 के लिए 10 लाख बैरल प्रतिदिन की सप्लाई में बाधा (disruption allowance) को भी बेस केस में शामिल किया है, जो एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बढ़ते खतरों को दर्शाता है।
ग्लोबल मार्केट और निवेशकों पर असर
अक्टूबर में क्रूड ऑयल में 14% की बड़ी रैली देखी गई थी, जिससे कीमतें 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। सिर्फ Goldman Sachs ही नहीं, बल्कि Morgan Stanley और ANZ जैसे दिग्गज बैंक भी $105 का टारगेट सेट कर चुके हैं।
निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि अगर एनर्जी की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो यह ग्लोबल इकोनॉमी पर 'टैक्स' की तरह काम करेगा। इससे डिमांड में कमी आ सकती है और महंगाई दर बढ़ सकती है, जिसका असर U.S. Federal Reserve की पॉलिसी पर पड़ना तय है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भारत जैसे इम्पोर्ट-डिपेंडेंट देशों के लिए क्रूड की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं। इससे इम्पोर्ट बिल बढ़ता है, करंट अकाउंट डेफिसिट पर असर पड़ता है और रुपये की वैल्यू पर दबाव बढ़ता है। अब बाजार की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह रिस्क प्रीमियम सिर्फ एक डर है, या फिर फिजिकल सप्लाई में वास्तव में कमी आएगी।
