Goldman Sachs ने साल के अंत तक के लिए सोने की कीमतों का अनुमान **$500** घटाकर **$4,900** प्रति औंस कर दिया है। यह कटौती इसलिए की गई है क्योंकि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें अब **2026 के आखिर** तक टल गई हैं, और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर ज्यादा सतर्क दिख रहा है।
क्यों हुआ ये बड़ा बदलाव?
Goldman Sachs Group Inc. ने सोने की कीमतों पर अपने रुख को बदल दिया है। बैंक ने साल के अंत के लिए अपना लक्ष्य $500 कम करके $4,900 प्रति औंस कर दिया है। यह बदलाव बैंक की पिछली उम्मीदों से बिल्कुल अलग है। इसका मुख्य कारण अमेरिका के फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती सोच है। फर्म के इकोनॉमिस्ट्स अब उम्मीद कर रहे हैं कि ब्याज दरों में कटौती 2026 के जून और दिसंबर तक ही हो पाएगी, जबकि पहले उम्मीद थी कि यह इसी साल जल्दी हो जाएगी।
निवेशकों के लिए क्यों है ये ज़रूरी?
निवेशकों के लिए, सोने और ब्याज दरों का रिश्ता समझना बहुत जरूरी है। सोना एक ऐसा एसेट है जिस पर कोई ब्याज या डिविडेंड (Dividend) नहीं मिलता। जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सरकारी बॉन्ड जैसे दूसरे निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं क्योंकि वे गारंटीड रिटर्न देते हैं। ऐसे में, जब बाज़ार को उम्मीद होती है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहेंगी, तो सोने की मांग अक्सर कम हो जाती है। इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
फेडरल रिजर्व का नया रुख
यह बदलाव फेडरल रिजर्व के लीडरशिप की ओर से महंगाई को लेकर आई टिप्पणियों के बाद आया है। केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नए फेड चेयरमैन बनने के बाद, बाज़ार पॉलिसी में बदलाव की उम्मीद कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती मीटिंग्स में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए सख्त मॉनेटरी पॉलिसी पर जोर दिया गया है, न कि बाज़ार की उम्मीद के मुताबिक राहत देने पर। इस भावना के चलते सोने वाले एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (Gold-backed ETFs) में निवेश धीमा हो गया है, क्योंकि निवेशक ऊंची ब्याज दरों वाले माहौल में सोने में अपने निवेश का फिर से मूल्यांकन कर रहे हैं।
और ऊंची दरों का खतरा?
ब्याज दरों में कटौती में देरी के अलावा, यह भी जोखिम है कि दरें और बढ़ सकती हैं। Goldman Sachs के वाइस चेयरमैन, रॉब कपलान (Rob Kaplan) ने कहा है कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो फेडरल रिजर्व सितंबर में भी ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो सोने की कीमतों पर और दबाव आ सकता है, और बैंक के अनुमानों के मुताबिक साल के अंत तक कीमतें $4,400 प्रति औंस तक गिर सकती हैं।
सोने को कहां मिल रहा सहारा?
अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी के दबाव के बावजूद, सोना दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों की खरीद से सहारा पा रहा है। ये संस्थान लगातार सोने के खरीदार रहे हैं, और Goldman Sachs को उम्मीद है कि यह ट्रेंड मजबूत रहेगा। इस साल हर महीने औसतन 50 टन और 2026 में 40 टन की खरीद की उम्मीद है। सेंट्रल बैंकों की यह लगातार मांग सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट को रोकने का काम कर रही है, भले ही निवेशक सतर्क हो रहे हों।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले महीनों में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य फैक्टर्स पर निवेशक नजर रख सकते हैं। पहला, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण रहेंगे; उम्मीद से ज्यादा महंगाई बढ़ने पर दरों में वृद्धि की संभावना बढ़ सकती है। दूसरा, फेडरल रिजर्व की भविष्य की टिप्पणियां, खासकर चेयरमैन केविन वॉर्श की, ब्याज दरों के टाइमलाइन में किसी भी बदलाव के लिए बारीकी से देखी जाएंगी। आखिर में, सेंट्रल बैंक द्वारा सोने की खरीद का डेटा यह बताएगा कि सोने की कीमतों के लिए यह सपोर्ट लेवल कितना मजबूत बना रहता है।
