गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने साल के अंत के लिए सोने की कीमतों का अपना अनुमान घटाकर **$4,900** प्रति औंस कर दिया है। पहले यह अनुमान **$5,400** था। यह कटौती अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा **2026** तक ब्याज दरों में कटौती रोकने की संभावनाओं को देखते हुए की गई है।
क्या हुआ?
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने सोने के भावों (Gold Prices) पर अपना साल के अंत का अनुमान $500 घटाकर $4,900 प्रति औंस कर दिया है। पहले फर्म का लक्ष्य $5,400 था। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) 2026 तक ब्याज दरों को अपरिवर्तित रख सकता है, जैसा कि पहले उम्मीद की जा रही थी, वैसी कटौती नहीं होगी। बैंक ने गोल्ड-ईटीएफ (Gold-backed ETFs) में निवेश के अनुमान में भी कमी का जिक्र किया है।
ब्याज दरें और सोने का रिश्ता
इसे समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जब ब्याज दरें ज़्यादा होती हैं, तो सोना निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोना खुद कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सरकारी बॉन्ड या बैंक में पैसा रखकर गारंटीड रिटर्न कमा सकते हैं। ऐसे में सोने को रखने की 'अवसर लागत' (opportunity cost) बढ़ जाती है।
जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को स्थिर रखता है या बढ़ने का संकेत देता है, तो सोने जैसी चीज़ों पर दबाव बना रहता है, जो नियमित आय नहीं देतीं। यह उम्मीद कि ब्याज दरों में कटौती 2027 तक टल सकती है, गोल्डमैन सैक्स के टारगेट प्राइस को कम करने का सीधा कारण बनी है।
अनुमान क्यों बदला?
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नेतृत्व में, फेड अपनी मौद्रिक नीति का मुख्य फोकस महंगाई को कंट्रोल करना है। हालिया डेटा और पॉलिसी कमेंट्री से पता चलता है कि फेड दरों को कम करने में जल्दबाजी नहीं करेगा, कुछ अनुमानों के मुताबिक दरों में कटौती जून और दिसंबर 2027 में हो सकती है। यह कदम लगातार बनी हुई महंगाई के जोखिमों से निपटने के लिए उठाया जा रहा है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी अनिश्चितता बढ़ाई है, जिससे निवेशक सेफ-हेवन एसेट्स और रिस्क-ऑन निवेश के बीच आवाजाही कर रहे हैं, और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ रहा है।
बाज़ार के अलग-अलग विचार
जहां गोल्डमैन सैक्स का नजरिया सतर्क है, वहीं बाज़ार में राय बंटी हुई है। उदाहरण के लिए, जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च (J.P. Morgan Global Research) का नज़रिया ज़्यादा सकारात्मक है। वे अनुमान लगा रहे हैं कि 2026 के अंत तक सोने की कीमतें औसतन $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं और 2027 में और भी बढ़ सकती हैं। यह अंतर दर्शाता है कि वित्तीय संस्थान भले ही ब्याज दरों, महंगाई और भू-राजनीति जैसे कारकों पर सहमत हों, लेकिन वे उनके प्रभाव का वज़न अलग-अलग तरीके से करते हैं। निवेशकों के लिए ऐसे विरोधाभासी लक्ष्य कमोडिटी मार्केट में उच्च अनिश्चितता और अस्थिरता का संकेत देते हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, बाज़ार के भागीदारों का मुख्य ध्यान अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर रहेगा, खासकर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स पर। यदि PCE रीडिंग उम्मीद से ज़्यादा आती है, तो यह संकेत दे सकता है कि महंगाई एक खतरा बनी हुई है, जिससे ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। इसके विपरीत, यदि रीडिंग कम आती है, तो दर कटौती की कहानी बदल सकती है। आर्थिक डेटा के अलावा, निवेशक सेंट्रल बैंकों की खरीदारी के पैटर्न और मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिरता पर भी नज़र रख रहे हैं, क्योंकि ये कारक वैश्विक सोने की मांग और कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।
