सेंट्रल बैंक की गोल्ड पर नजर!
गोल्डमैन सैक्स के जानकारों ने अपनी एक नई रिपोर्ट में कहा है कि सेंट्रल बैंक सोने को लेकर अपना रुझान बढ़ा रहे हैं। जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) वजहों से रिजर्व्स में डायवर्सिफिकेशन (Diversification) करने की चाहत बढ़ रही है। इसी को देखते हुए, 2026 तक हर महीने लगभग 60 टन सोने की खरीददारी का अनुमान है। गोल्डमैन सैक्स ने सोने के लिए साल के अंत तक $5,400 प्रति औंस का टारगेट प्राइस (Target Price) भी रखा है। ये अनुमान UBS Group AG और ANZ Group Holdings Ltd जैसे दूसरे बड़े ब्रोकरेज हाउसेस से भी मिलते-जुलते हैं।
क्यों है सोने में इतनी दिलचस्पी?
दुनिया भर में बढ़ती महंगाई और एनर्जी कॉस्ट (Energy Cost) ने सेंट्रल बैंकों के लिए मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को आसान बनाना मुश्किल कर दिया है। इससे बॉन्ड मार्केट (Bond Market) में बिकवाली बढ़ी है, जिसका असर सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) पर पड़ा है। हाल के नतीजों के मुताबिक, पहले क्वार्टर में सेंट्रल बैंकों ने 244 टन सोना खरीदा, जो पिछले क्वार्टर के 208 टन से ज्यादा है। ये दिखाता है कि ऑफिशियल सेक्टर (Official Sector) की गोल्ड में दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा, ग्लोबल टेंशन (Global Tension) के चलते लोग अपना पैसा करेंसी और पारंपरिक फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स (Financial Instruments) से हटाकर सोने जैसी स्टेबल एसेट (Stable Asset) में लगा रहे हैं।
शॉर्ट-टर्म में ये रिस्क भी
गोल्डमैन सैक्स के पॉजिटिव आउटलुक (Outlook) के बावजूद, सोना अभी कुछ शॉर्ट-टर्म रिस्क (Short-term Risk) का सामना कर रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर इक्विटी मार्केट (Equity Market) में गिरावट आती है, तो प्राइवेट इन्वेस्टर्स (Private Investors) अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सोना बेच सकते हैं। ऐसे में, जब उन्हें लिक्विडिटी (Liquidity) की जरूरत पड़ेगी, तो वे अपने गोल्ड होल्डिंग्स को बेच सकते हैं। यह बिकवाली, सेंट्रल बैंकों की खरीददारी पर भारी पड़ सकती है और कीमतों को नीचे ला सकती है। गोल्डमैन सैक्स के $5,400 के टारगेट के मुकाबले, Citi जैसे ब्रोकरेज $5,000 के आसपास का कंजरवेटिव (Conservative) टारगेट दे रहे हैं।
आगे क्या?
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीददारी से सोने की कीमतों में एक स्थिर अपट्रेंड (Upward Trajectory) देखने को मिल सकता है, भले ही उसमें उतार-चढ़ाव आए। $5,400 का टारगेट एक अहम लेवल रहेगा। हालांकि, नियर-टर्म (Near-term) का फ्यूचर इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑफिशियल सेक्टर की डिमांड प्राइवेट इन्वेस्टर्स की लिक्विडिटी की जरूरत से कैसे मुकाबला करती है। महंगाई और सेंट्रल बैंकों की सतर्क पॉलिसी की वजह से, सोना एक डायवर्सिफिकेशन और वेल्थ प्रिजर्वेशन (Wealth Preservation) एसेट के तौर पर अपनी अहमियत बनाए रखेगा।