Gold/Silver ETFs: शेयर बाज़ार को छोड़ा पीछे! January 2026 में ₹33,000 Cr का रिकॉर्ड निवेश, ये है वजह

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AuthorMehul Desai|Published at:
Gold/Silver ETFs: शेयर बाज़ार को छोड़ा पीछे! January 2026 में ₹33,000 Cr का रिकॉर्ड निवेश, ये है वजह
Overview

Gold और Silver Exchange Traded Funds (ETFs) के लिए January 2026 का महीना ऐतिहासिक रहा। इन Precious Metals ETFs में करीब **₹33,000 करोड़** का रिकॉर्ड नेट इनफ्लो (Net Inflow) आया, जो कि इक्विटी फंड्स द्वारा जुटाए गए **₹24,029 करोड़** से कहीं ज़्यादा है। यह बड़ा बदलाव Commodities के भाव में आई ज़बरदस्त तेजी और शेयर बाज़ार की Unpredictable Volatility की वजह से हुआ।

Investors की रणनीति में बड़ा बदलाव

January 2026 में Investors का रुझान Gold और Silver ETFs की ओर बुरी तरह पलटा है। यह बदलाव Commodities के दामों में आई भारी उछाल और शेयर बाज़ार में छाई घबराहट का सीधा नतीजा है। ₹33,000 करोड़ का यह भारी-भरकम इनफ्लो दिखाता है कि निवेशकों ने जोखिम को लेकर अपनी रणनीति बदली है और वे पारंपरिक इक्विटी (Equity) की जगह सुरक्षित माने जाने वाले Assets की ओर बढ़ रहे हैं।

Commodities में तूफानी तेजी और शेयर बाज़ार का डर

Gold और Silver ETFs में इतनी बड़ी रकम आने की मुख्य वजह इन धातुओं की कीमतों में आई तूफानी तेजी थी। New York Commodity Exchange (NYMEX) पर Gold की कीमत 23% उछलकर करीब $1,000 प्रति औंस बढ़ी और रिकॉर्ड $5,586 पर पहुंच गई। Silver में तो और भी ज़बरदस्त तेजी देखी गई, कीमत 60% से ज़्यादा बढ़कर $70 से $121 तक जा पहुंची, हालांकि बाद में यह $84 पर स्थिर हुई। भारतीय बाज़ार में, कमजोर होते रुपये (Weakening Rupee) ने इस तेजी को और बढ़ा दिया। Gold ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम और Silver ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। दूसरी ओर, शेयर बाज़ार में काफी Unpredictability थी, जिससे निवेशक इन Tangible Assets की ओर भागे। हालांकि, इन सबके बीच, Industry का कुल AUM (Assets Under Management) ₹81 लाख करोड़ के पार चला गया, जो बाज़ार का बड़ा पैमाना दिखाता है। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) के ज़रिए Gross Inflows ने भी ₹31,002 करोड़ का नया ऑल-टाइम हाई बनाया, जिससे पता चलता है कि Retail Investors अभी भी Equity में निवेश कर रहे हैं।

'Performance Chasing' का दिखा असर

January 2026 में Funds के Flow में एक बड़ा और अजीब बदलाव दिखा। आमतौर पर, इक्विटी स्कीम्स (Equity Schemes) में सबसे ज़्यादा इनफ्लो आता है, लेकिन इस महीने इक्विटी फंड्स ने ₹24,029 करोड़ जुटाए, जो Gold और Silver ETFs के संयुक्त ₹33,000 करोड़ से काफी कम थे। Market Experts इसे 'Performance Chasing Behaviour' कह रहे हैं, यानी निवेशक उन Assets की तरफ भाग रहे हैं जिनमें तुरंत और ज़बरदस्त रिटर्न दिख रहा हो। अकेले Gold ETFs में करीब ₹24,040 करोड़ का इनफ्लो आया, जबकि Silver ETFs में करीब ₹9,000 करोड़ आए। Nippon Life MF जैसी बड़ी फंड हाउसेस के Gold ETFs का AUM ₹1.63 लाख करोड़ और Silver ETFs का AUM ₹1.13 लाख करोड़ रहा। यह ट्रेंड ऐतिहासिक डेटा से बिल्कुल अलग है, जहाँ इक्विटी फंड्स हमेशा Commodity ETFs से आगे रहे हैं। इससे निवेशकों के Risk Appetite में बड़े बदलाव का संकेत मिलता है। January 2026 में Indian Equity Market में गिरावट देखी गई, जिससे Precious Metals में सुरक्षा की तलाश बढ़ गई।

जोखिम पर भी एक नज़र

Gold और Silver की कीमतों में आई यह रिकॉर्ड तेजी और ETF इनफ्लो एक चिंताजनक स्थिति भी पैदा करते हैं। January के आखिरी ट्रेडिंग दिन Gold की कीमत में 12% की भारी गिरावट एक सख्त चेतावनी थी। यह दिखाता है कि Commodities बाज़ार में तेज़ी से बढ़ी कीमतों में कितनी Volatility और Speculation हो सकती है। जो निवेशक सिर्फ परफॉरमेंस के पीछे भाग रहे हैं, वे बड़ा नुकसान उठा सकते हैं। इक्विटी निवेश के विपरीत, जो कंपनी की कमाई और लंबी अवधि के विकास पर आधारित होते हैं, Commodity की कीमतें Sentiment, Currency Fluctuations और Macroeconomic Shocks से ज़्यादा प्रभावित होती हैं, और उनमें अचानक गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, कमजोर रुपये की वजह से घरेलू Commodity की कीमतों में आई उछाल एक और जोखिम है; अगर रुपया मजबूत हुआ तो ये फायदे तेज़ी से गायब हो जाएंगे। Precious Metals में यह उछाल आत्मविश्वास से ज़्यादा डर को दिखाता है, और यह Financial System की अंदरूनी कमजोरियों को भी छुपा सकता है।

आगे क्या?

हालांकि Precious Metals ETFs में तुरंत हुई इस उछाल ने सबका ध्यान खींचा है, पर इस ट्रेंड के बने रहने पर सवाल बना हुआ है। Analysts का मानना है कि अगर शेयर बाज़ार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहीं, तो Investors Gold और Silver को Diversification के लिए इस्तेमाल करते रहेंगे। लेकिन, January में देखी गई तेज़ intraday उतार-चढ़ाव यह भी बताते हैं कि Profit Taking (मुनाफा वसूली) तेज़ हो सकती है। अगर बाज़ार का Sentiment बदला या Equity Markets स्थिर हुए, तो Outflows (पैसा बाहर निकलना) भी हो सकते हैं। Brokerage Houses का कहना है कि Precious Metals पर नज़र बनाए रखना समझदारी है, खासकर Inflation Hedging और Safe Haven के तौर पर, लेकिन केवल Past Performance के आधार पर अंधाधुंध निवेश से बचना चाहिए। Investors को Macroeconomic माहौल और विभिन्न Assets की तुलनात्मक आकर्षकता पर ध्यान देना होगा।

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