DSP एसेट मैनेजर्स की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सोना और चांदी की मौजूदा कीमतें उनके कैलकुलेटेड फेयर वैल्यू (Fair Value) से कम चल रही हैं। विश्लेषण से पता चलता है कि सोना करीब **10.7%** और चांदी **21.8%** के डिस्काउंट पर ट्रेड कर रही है।
सोने-चांदी के वैल्यूएशन पर DSP का विश्लेषण
DSP एसेट मैनेजर्स की एक ताज़ा रिपोर्ट ने कीमती धातुओं, खास तौर पर सोना और चांदी की मौजूदा कीमतों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों धातुएं अपने थ्योरिटिकल फेयर वैल्यू (Theoretical Fair Value) से कम पर ट्रेड कर रही हैं। फर्म ने एक वैल्यूएशन मॉडल तैयार किया है जो अब तक खोदे गए सोने की कुल मात्रा (जिसका अनुमान 7.24 बिलियन ट्रॉय औंस है) को ग्लोबल लिक्विडिटी (Global Liquidity) के उपायों से जोड़ता है। इसमें मुख्य रूप से अमेरिकी M2 मनी सप्लाई और यूरोज़ोन की M2 सप्लाई का एक हिस्सा शामिल है।
सोने का वैल्यूएशन मेट्रिक्स
इस मॉडल के आधार पर, फर्म ने सोने का मिडपॉइंट फेयर वैल्यू $3,828 प्रति ट्रॉय औंस कैलकुलेट किया है। 1 जुलाई, 2026 तक सोने की स्पॉट प्राइस $3,994.1 प्रति ट्रॉय औंस दर्ज की गई थी। इसके हिसाब से, यह कीमती धातु वैल्यूएशन मॉडल के ऊपरी छोर से लगभग 10.7% नीचे ट्रेड कर रही है। यह मॉडल सोने के मूल्य का पता लगाने की कोशिश करता है, खासकर ग्लोबल मनी सप्लाई के बैकड्रॉप में, जिससे यह पता चलता है कि मौजूदा कीमतें ऐतिहासिक मौद्रिक विस्तार को पूरी तरह से नहीं दर्शा रही हैं।
चांदी में ओवर-अंडरवैल्यूएशन का गैप
चांदी के मामले में, विश्लेषण गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो (Gold-to-Silver Ratio) पर निर्भर करता है। यह एक आम तरीका है जिसका इस्तेमाल दोनों धातुओं की रिलेटिव कीमतों की तुलना करने के लिए किया जाता है, खासकर तब से जब चांदी ने मॉनेटरी सिस्टम में अपनी औपचारिक भूमिका छोड़ दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 जुलाई को चांदी $58.295 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी। सोने के कैलकुलेटेड फेयर वैल्यू पर ऐतिहासिक रेश्यो लागू करके, रिपोर्ट चांदी के लिए लगभग $64 प्रति औंस के थ्योरिटिकल फेयर वैल्यू का अनुमान लगाती है। यह 21.8% के डिस्काउंट को दर्शाता है। इसका मतलब है कि फर्म की मेथोडोलॉजी के अनुसार, सोना की तुलना में चांदी वर्तमान में अंडरवैल्यूएशन (Undervaluation) का उच्च स्तर दिखा रही है।
वैल्यूएशन मॉडल्स को समझना
निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि ये आंकड़े मनी सप्लाई और ऐतिहासिक सप्लाई डेटा पर आधारित एक स्पेसिफिक थ्योरिटिकल मॉडल से निकले हैं। हालांकि ऐसे मॉडल कमोडिटी वैल्यूएशन (Commodity Valuation) को देखने का एक स्ट्रक्चर्ड तरीका प्रदान करते हैं, लेकिन सोना और चांदी की असली मार्केट प्राइस कई फैक्टर्स से प्रभावित होती है। इनमें ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स, सेंट्रल बैंक की खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव और चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड शामिल हैं।
इस तरह के वैल्यूएशन मॉडल की इफेक्टिवनेस इस धारणा पर बहुत निर्भर करती है कि मनी सप्लाई और सोने के रिजर्व के बीच का संबंध समय के साथ स्थिर रहेगा। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि इस तरह के मॉडल प्राइस प्रिडिक्टर (Price Predictor) नहीं हैं और ये डेली मार्केट फ्लक्चुएशन (Market Fluctuation) या मैक्रोइकोनॉमिक पॉलिसी (Macroeconomic Policy) में अचानक बदलावों को ध्यान में नहीं रखते। निवेशकों के लिए अगला महत्वपूर्ण अपडेट यह देखना होगा कि ग्लोबल इन्फ्लेशनरी ट्रेंड्स (Inflationary Trends) और इंटरेस्ट रेट के फैसलों के मुकाबले असल मार्केट प्राइस कैसे मूव करती है, जो अक्सर लॉन्ग-टर्म थ्योरिटिकल वैल्यूएशन फ्रेमवर्क की तुलना में कीमती धातुओं की कीमतों को ज़्यादा तेज़ी से प्रभावित करते हैं।
