Gold-Silver Price Strategy: फेडरल रिजर्व ने रोके ब्याज दरें, अब सोना-चांदी में क्या करें निवेशक?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold-Silver Price Strategy: फेडरल रिजर्व ने रोके ब्याज दरें, अब सोना-चांदी में क्या करें निवेशक?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है, जिससे कीमती धातुओं, यानी सोना और चांदी में निवेशकों के लिए अनिश्चितता का माहौल है। एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि निवेशक एकमुश्त निवेश करने के बजाय, कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे खरीदारी करें।

फेड की ब्याज दरें स्थिर, सोने-चांदी पर असर

हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया है। इस कदम से जहां एक ओर फिलहाल दरों में और बढ़ोतरी की चिंता कम हुई है, वहीं दूसरी ओर फेडरल रिजर्व का महंगाई से लड़ने का संघर्ष और अधिकारियों के बीच भविष्य की नीतियों को लेकर मतभेद, यह संकेत दे रहे हैं कि ब्याज दरें उम्मीद से ज़्यादा समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।

सोने-चांदी पर ब्याज दरों का खेल

सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए ऊंची ब्याज दरें अक्सर एक चुनौती पेश करती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये दरें सरकारी बॉन्ड जैसे दूसरे निवेशों पर मिलने वाले रिटर्न को बढ़ा देती हैं। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो सोने जैसी 'नॉन-यील्डिंग' एसेट्स का आकर्षण कम हो जाता है। हालांकि, मौजूदा समय में कीमती धातुओं को वैश्विक स्तर पर सेंट्रल बैंकों की ज़बरदस्त खरीदारी, भू-राजनीतिक तनावों के कारण सेफ-हेवन डिमांड और डी-डॉलराइजेशन (Dollar से निर्भरता कम करना) जैसे फैक्टर्स का सहारा मिल रहा है। इस वजह से कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जहां आर्थिक आंकड़े अचानक कीमतों में बड़े बदलाव ला रहे हैं।

बाजार के जानकारों का मानना है कि फेडरल रिजर्व का डेटा-डिपेंडेंट (Data-Dependent) रुख बताता है कि भविष्य में नीतियां बदल सकती हैं। कुछ अधिकारी तो यह भी कह रहे हैं कि अगर महंगाई काबू में नहीं आई तो और ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं। इस अनिश्चितता के कारण, अगले कुछ महीनों में बाजार में छोटी-मोटी उठापटक जारी रहने की उम्मीद है, खासकर जब बाजार आने वाली नीतिगत अपडेट का इंतज़ार कर रहा है।

निवेश की रणनीति और कीमतों का अनुमान

इस मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, कई एक्सपर्ट्स एक साथ बड़ी रकम निवेश करने से बचने की सलाह दे रहे हैं। इसके बजाय, 'स्टैगर्ड अप्रोच' (Staggered Approach) यानी कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे, किस्तों में खरीदारी करने की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। यह रणनीति निवेशकों को कीमतों में आई कमी का फायदा उठाने के साथ-साथ बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के असर को कम करने में मदद करती है।

कीमतों के अनुमान की बात करें तो, कुछ विश्लेषकों का लंबी अवधि के लिए नज़रिया सकारात्मक बना हुआ है। घरेलू बाजार में सोने की कीमतों के लिए ₹1,40,000 से ₹1,48,000 प्रति 10 ग्राम तक की रेंज का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि चांदी के लिए अगले कुछ महीनों में ₹2,00,000 से ₹2,30,000 प्रति किलोग्राम तक का कारोबार देखने को मिल सकता है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये अनुमान काफी हद तक वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेंगे, जिनमें US Treasury yields और अमेरिकी डॉलर की मजबूती शामिल है। निवेशकों को आने वाली महंगाई की रिपोर्टों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि यही कीमतें बढ़ने के मुख्य ट्रिगर साबित होंगे। अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है, और ऐसे में इस साल के बाकी समय के लिए ब्याज दरों में बदलाव की रफ्तार सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.