Gold-Silver Prices: डॉलर का 'दादागिरी' और ब्याज दरें बेकाबू! सोने-चांदी पर गिरी गाज

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold-Silver Prices: डॉलर का 'दादागिरी' और ब्याज दरें बेकाबू! सोने-चांदी पर गिरी गाज
Overview

सोने और चांदी की कीमतों में आज यानी सोमवार को गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर, बढ़ती तेल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच मार्केट में Inflation को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। एनालिस्ट्स का मानना है कि ब्याज दरें लम्बे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे Gold जैसी नॉन-इंटरेस्ट देने वाली एसेट्स की वैल्यू कम हो जाती है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

क्यों गिरी सोने-चांदी की कीमतें?

कीमती धातुओं, सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे कई आर्थिक कारण हैं। अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और लगातार बनी हुई Inflation की चिंताएं, इन मेटल्स को निवेशकों के लिए कम आकर्षक बना रही हैं। खासकर तब, जब ग्लोबल सेंट्रल बैंक्स Inflation को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरों को लम्बे समय तक ऊंचा रखने पर जोर दे रहे हैं।

मार्केट का हाल और ETFs

सोमवार, 11 मई 2026 को स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट देखी गई। SPDR Gold Shares ETF (GLD) लगभग 5.38 मिलियन शेयर्स के साथ $433.77 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि iShares Silver Trust ETF (SLV) लगभग 19.13 मिलियन शेयर्स के साथ $73.01 पर था। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) का 103.0 के ऊपर बने रहना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी जियोपॉलिटिकल टेंशन के चलते तेल की कीमतों में यह वृद्धि और भी गंभीर हो गई।

Inflation, फेड की पॉलिसी और ब्याज दरें

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि Inflation को काबू करने के लिए फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) 'हायर फॉर लॉगर' (Higher for Longer) इंटरेस्ट रेट पॉलिसी पर कायम रहेगा। अप्रैल 2026 के लिए कोर CPI में 2.7% सालाना वृद्धि का अनुमान है, जबकि मार्च में 3.3% की बढ़ोतरी के बाद हेडलाइन Inflation 3.7% रहने का फोरकास्ट है। फेड का करंट टारगेट रेट 3.50%-3.75% है। अब मार्केट्स 2026 में इंटरेस्ट रेट कट के बजाय रेट हाइक की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे माहौल में, जहां ब्याज दरें ऊंची हैं, गोल्ड जैसी एसेट्स, जो कोई इंटरेस्ट नहीं देतीं, उन्हें होल्ड करना महंगा साबित होता है।

ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव और डॉलर का असर

ऐतिहासिक रूप से, गोल्ड की कीमतें अमेरिकी डॉलर के विपरीत दिशा में चलती हैं, और एक मजबूत डॉलर आमतौर पर गोल्ड की बढ़त को सीमित करता है। उदाहरण के तौर पर, मार्च 2026 में, ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करने की धमकी के बाद सिर्फ कुछ हफ्तों में गोल्ड की कीमतों में लगभग 20% की गिरावट आई थी। उस समय डॉलर मजबूत हुआ था और निवेशकों को मार्जिन कॉल्स का सामना करना पड़ा था, जिससे कीमतें लगभग $5,400 से घटकर $4,400 प्रति औंस से नीचे आ गई थीं।

माइनिंग स्टॉक्स और आगे का आउटलुक

GLD ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.40% है, और SLV का 0.50%, जो निवेशकों के लिए लगातार लागतें हैं। न्यूमोंट माइनिंग (Newmont Mining) जैसी गोल्ड माइनिंग कंपनियां, जिनका P/E रेश्यो लगभग 15-18 है, और बैरिक गोल्ड (Barrick Gold), जिनका P/E रेश्यो 13.8x से 20x से अधिक है, वे भी ऐसी ही चुनौतियों का सामना करती हैं अगर कीमती धातुओं की कीमतें तेजी से गिरती हैं। कुछ एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अल्पावधि में गोल्ड के लिए सीमित अपसाइड है, और कीमतें एक रेंज में ट्रेड कर सकती हैं, जिसमें गिरावट का ट्रेंड रहने की संभावना है।

भविष्य के संकेत

आगे चलकर, जब तक जियोपॉलिटिकल टेंशन काफी ज्यादा नहीं बढ़ती या डॉलर काफी कमजोर नहीं होता, तब तक गोल्ड की कीमतों में एक सीमित रेंज में ट्रेड और नीचे की ओर ट्रेंड रहने की उम्मीद है। निवेशक मार्केट की दिशा का अंदाजा लगाने के लिए आने वाले अमेरिकी Inflation डेटा और फेडरल रिजर्व के बयानों पर करीब से नजर रखेंगे। उदाहरण के लिए, बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि फेड लगातार Inflation और मजबूत जॉब ग्रोथ के कारण रेट कट्स को 2027 की दूसरी छमाही तक टाल सकता है। यह गोल्ड की अपील पर दबाव बनाए रख सकता है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.