MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स **₹1.51 लाख** प्रति 10 ग्राम और सिल्वर **₹2.25 लाख** प्रति किलो के आसपास स्थिर है। बाजार अब अमेरिकी इकोनॉमिक डेटा और फेडरल रिजर्व के रुख का इंतजार कर रहा है।
बाजार में सुस्ती का माहौल
भारतीय कमोडिटी बाजार में कीमती धातुओं की चमक फिलहाल एक दायरे में सिमटी हुई है। 11 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला गोल्ड ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि सिल्वर ₹2.25 लाख प्रति किलो के स्तर पर ट्रेड कर रही है।
रुपये की कमजोरी बनी सहारा
घरेलू बाजार में सोने को रुपये की गिरावट से कुछ हद तक सपोर्ट मिल रहा है। चूंकि भारत अपनी सोने की अधिकांश मांग आयात के जरिए पूरी करता है, इसलिए रुपया कमजोर होने से सोना महंगा हो जाता है। यही कारण है कि ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता के बावजूद भारतीय बाजार में सोने की कीमतों को एक 'डिफेंसिव फ्लोर' मिला हुआ है, जबकि ग्लोबल स्पॉट गोल्ड $4,194 प्रति औंस के करीब चल रहा है।
ग्लोबल प्रेशर और ब्याज दरें
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.27% के स्तर पर पहुंचना गोल्ड के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जब सरकारी बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिलता है, तो बिना ब्याज देने वाली एसेट यानी सोने का आकर्षण कम हो जाता है। निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर में ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लेगा।
सिल्वर की बदलती चाल
सिल्वर की कहानी गोल्ड से थोड़ी अलग है, क्योंकि यह एक प्रेशियस मेटल होने के साथ-साथ इंडस्ट्रियल मेटल भी है। सोलर और टेक सेक्टर से आने वाली डिमांड इसकी कीमतों को प्रभावित करती है। हालांकि, 2027 तक सप्लाई सरप्लस (सप्लाई बढ़ने) की आशंका और इंडस्ट्रियल प्लेयर्स का विकल्पों की ओर रुख करना सिल्वर की तेजी को सीमित कर सकता है।
आने वाले दिनों में भारत, चीन और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। साथ ही, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की स्थिति सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में रिस्क प्रीमियम को बनाए रख सकती है।
