भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ ने बढ़ाई कीमतों में तेज़ी
26 फरवरी 2026 को कीमती धातुओं (Precious Metals) के बाज़ार में हलचल मच गई। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और अमेरिका द्वारा नए टैरिफ (Tariffs) लगाए जाने की ख़बरों ने निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर दी। इसी डर के चलते, लोगों ने सुरक्षित माने जाने वाले Gold और Silver में निवेश बढ़ा दिया। नतीजतन, Gold Spot की कीमत 0.67% की उछाल के साथ $5,199.81 प्रति औंस तक पहुंच गई, जबकि Silver में भी 0.64% की बढ़त देखी गई और यह $89.67 पर कारोबार कर रही है।
कमज़ोर डॉलर और मिले-जुले यील्ड संकेत
इस तेज़ी में अमेरिकी डॉलर (US Dollar) का कमज़ोर होना भी एक बड़ा फैक्टर रहा। डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.07% गिरकर 97.5714 पर आ गया। जब डॉलर कमज़ोर होता है, तो डॉलर में ट्रेड होने वाली चीज़ें, जैसे सोना, दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सस्ती हो जाती हैं, जिससे मांग बढ़ती है। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yields) मिले-जुले संकेत दे रहे थे, जहां 10-साल की यील्ड थोड़ी बढ़कर 4.09% हुई, वहीं 2-साल की यील्ड 3.48% पर आ गई, जिससे बाज़ार में थोड़ा कन्फ्यूजन बना रहा।
Trade War का डर और 'प्रोटेक्शनिस्ट' पॉलिसी
अमेरिकी राष्ट्रपति के 'प्रोटेक्शनिस्ट' यानी संरक्षणवादी व्यापार रुख ने भी कीमतों को सहारा दिया। 24 फरवरी 2026 से इंपोर्ट होने वाले ज़्यादातर सामानों पर 10% का नया टैरिफ लागू कर दिया गया है। इस पॉलिसी से Trade War (व्यापार युद्ध) का खतरा बढ़ गया है, जिसने ऐतिहासिक तौर पर Gold और Silver जैसी सुरक्षित संपत्तियों (Safe-Haven Assets) की ओर रुझान बढ़ाया है। माना जा रहा है कि ये टैरिफ 150 दिनों के बाद खत्म हो जाएंगे, लेकिन तब तक ये अनिश्चितता बाज़ार को प्रभावित करती रहेगी।
भारत में कीमतों में गिरावट, वैश्विक रुझान के उलट
लेकिन, वैश्विक तेज़ी के उलट, भारत के कीमती धातुओं के बाज़ार में गिरावट देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर Gold Futures 0.35% की नरमी के साथ ₹1,60,619 पर आ गए, जबकि Silver Futures में 1.31% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये ₹2,64,799 पर कारोबार कर रहे थे।
भारत में कमज़ोर मांग और रुपये का असर
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सोने के खरीदार भारत में, इन घरेलू कीमतों का असर भारतीय रुपये (Indian Rupee) के प्रदर्शन से भी जुड़ा है। भले ही रुपया पिछले महीने 0.53% मजबूत हुआ हो, लेकिन साल-दर-साल यह 4.15% नीचे है। भारत में पहले से ही रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के चलते सोने की मांग में कमी आई है, जिससे खरीदारी मुश्किल हो रही है। हालांकि, निवेश की मांग अभी भी बनी हुई है।
एक्सपर्ट्स की राय: बाज़ार में करेक्शन का डर?
हालांकि, इस तेज़ी के बावजूद, Gold और Silver की कीमतों पर कुछ आशंकाएं भी मंडरा रही हैं। भू-राजनीतिक तनाव अगर कम होता है, तो यह तेज़ी अचानक थम सकती है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाज़ार अपने चरम पर पहुंच गया हो सकता है और अब करेक्शन (Correction) का खतरा है। ऐतिहासिक रूप से, Trade Wars भले ही शुरुआत में सोने को बढ़ाएं, लेकिन ये लंबी अवधि में डॉलर को मजबूत कर सकते हैं, जिससे सोने की कीमतें गिर सकती हैं।
आर्थिक चुनौतियां और Silver की औद्योगिक मांग
लगातार बढ़ते टैरिफ वैश्विक विकास (Global Growth) पर भी असर डाल सकते हैं, जिससे औद्योगिक मांग कम हो सकती है, खासकर Silver की, जिसका इस्तेमाल उद्योगों में काफी होता है। भारत में, ऊंची घरेलू कीमतों ने ज्वैलरी की मांग को पहले ही दबा दिया है। ऐसे में, निरंतर मांग के लिए यह कीमत संवेदनशीलता एक जोखिम है।
आगे क्या?
आगे चलकर, Gold और Silver की कीमतें भू-राजनीतिक घटनाओं और अमेरिकी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के संकेतों के प्रति संवेदनशील रहेंगी। अगर मध्य पूर्व में शांति बढ़ती है या व्यापार विवाद सुलझते हैं, तो कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। निवेशकों को इस दौरान आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाओं पर पैनी नज़र रखनी चाहिए।
