अगस्त में शानदार प्रदर्शन के बाद, अब सितंबर में Gold और Silver की कीमतें उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। अमेरिका के मजबूत जॉब डेटा ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की अटकलों को हवा दे दी है, जिससे बुलियन मार्केट पर दबाव बन गया है।
अगस्त में जबरदस्त रिकवरी दिखाने वाले प्रीशियस मेटल्स मार्केट में सितंबर की शुरुआत के साथ ही अनिश्चितता का माहौल है। अमेरिका में आए ताजा लेबर मार्केट डेटा ने पूरी तस्वीर बदल दी है। सितंबर के शुरुआती दिनों में जारी रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी इकोनॉमी में 1,62,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो अनुमान से कहीं बेहतर है।
क्यों दबाव में हैं बुलियन?
इकोनॉमी की मजबूती को देखते हुए मार्केट में अब इस बात की चर्चा तेज है कि US Federal Reserve ब्याज दरों में कटौती के बजाय बढ़ोतरी का विकल्प चुन सकता है। गोल्ड और सिल्वर पर ब्याज नहीं मिलता, इसलिए जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशकों का रुझान इनकी तरफ कम हो जाता है। साथ ही, डॉलर की मजबूती भी ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना रही है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?
भारतीय मार्केट में इसका असर MCX फ्यूचर्स पर साफ दिख रहा है। अगस्त में सोना ₹1,60,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया था, लेकिन अब रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालांकि, भारतीय रुपया मजबूत होने से सोने के आयात की लागत कम हुई है, जो स्थानीय स्तर पर कीमतों को बढ़ने से रोक रही है।
टेक्निकल लेवल्स और अगला ट्रिगर
टेक्निकल एनालिस्ट्स अब अहम सपोर्ट लेवल्स पर नजर गड़ाए हुए हैं। COMEX गोल्ड के लिए $4,200 का सपोर्ट लेवल काफी क्रिटिकल है। यदि कीमत इससे नीचे फिसलती है, तो बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। मार्केट की नजर अब 11 सितंबर, 2026 को आने वाले US Consumer Price Index (CPI) डेटा पर है। इसी डेटा से तय होगा कि आने वाले दिनों में गोल्ड-सिल्वर की चाल क्या होगी। तब तक मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है।
