इस हफ्ते MCX पर सोना और चांदी के वायदा भावों (Futures) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) ने कीमती धातुओं पर दबाव बना दिया है। मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और ऊंची ब्याज दरों (Interest Rates) की उम्मीदों से भी इनकी मांग घट गई है।
ग्लोबल एनर्जी और करेंसी का असर
कीमती धातुओं में आई इस कमजोरी का मुख्य कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में आई जबरदस्त उछाल है। सप्लाई में संभावित दिक्कतों की चिंताओं के चलते तेल की कीमतें 14% से ज्यादा चढ़ गई हैं। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो यह महंगाई (Inflation) बढ़ने का संकेत देती है, जिससे सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। सोना चूंकि ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों और मजबूत डॉलर के सामने इसकी मांग कम हो जाती है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने की कीमतों में हल्की रिकवरी आते ही प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-booking) हो रही है, जो दर्शाता है कि ट्रेडर मौजूदा अस्थिर माहौल में लंबी पोजीशन बनाने से हिचकिचा रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और इकोनॉमिक डेटा
निवेशक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी करीबी नजर बनाए हुए हैं, खासकर अमेरिका और ईरान से जुड़ी हालिया घटनाओं के बाद। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता अक्सर निवेशकों को सोने जैसी 'सेफ-हेवन' (Safe-haven) एसेट्स की ओर खींचती है, लेकिन मौजूदा मार्केट में इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (Economic Indicators) का प्रभाव ज्यादा दिख रहा है। अमेरिका के जॉबलेस क्लेम्स (Jobless Claims) और परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जैसे आने वाले डेटा भविष्य की ब्याज दरों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के अधिकारियों की टिप्पणियां भी फोकस में हैं, क्योंकि उनकी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) पर राय नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) के प्रति सेंटीमेंट को आकार दे रही है।
मार्केट का संदर्भ और ध्यान देने योग्य बातें
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, Comex गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) 2.3% गिरकर $4,018.8 प्रति औंस पर आ गए हैं, जबकि चांदी की कीमतों में 6.4% की तेज गिरावट के साथ यह $56.32 प्रति औंस पर बंद हुई। घरेलू निवेशकों के लिए, मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर की मजबूती और क्रूड ऑयल की कीमतों की चाल पर नजर रखनी होगी। भविष्य में कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि भू-राजनीतिक स्थिति सप्लाई चेन में और बाधाएं पैदा करती है या मैक्रोइकोनॉमिक डेटा (Macroeconomic Data) ग्लोबल इंटरेस्ट रेट साइकल्स (Global Interest Rate Cycles) के मौजूदा आउटलुक को बदलने पर मजबूर करता है।
