भारत की मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी उछाल आई है। दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स 1,20,900 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गए, जबकि फरवरी 2026 गोल्ड फ्यूचर्स 1,22,231 रुपये के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। चांदी के फ्यूचर्स में भी भारी वृद्धि देखी गई, जिसमें मार्च 2026 सिल्वर फ्यूचर्स 1,49,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए, जो पिछले दिन के रिकॉर्ड के बाद था। इस तेजी के पीछे कई मुख्य कारण हैं:
- अमेरिकी आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताएं: अमेरिका में जारी सरकारी शटडाउन के कारण महत्वपूर्ण संघीय कार्यक्रमों में बाधा आ रही है और आर्थिक डेटा जारी होने में देरी हो रही है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
- फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें घटाने की अटकलें: इस बात की प्रबल उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अपनी आगामी बैठकों में ब्याज दरों में कटौती करेगा, जिससे सोना एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन एसेट) के रूप में और अधिक आकर्षक हो गया है।
- केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने एक बार फिर बड़ी मात्रा में सोने की खरीद शुरू कर दी है। अगस्त में, केंद्रीय बैंकों ने सामूहिक रूप से अपने भंडार में 15 टन सोना जोड़ा। उदाहरण के लिए, चीन के पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार 11वें महीने अपने सोने के भंडार में वृद्धि की है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी, Comex गोल्ड फ्यूचर्स 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गए, जो वैश्विक रुझान को दर्शाता है। बाजार सहभागियों (मार्केट पार्टिसिपेंट्स) की नजरें अमेरिकी मौद्रिक नीति और भविष्य में ब्याज दरों की चाल को लेकर फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों और FOMC बैठक के मिनट्स पर टिकी हुई हैं।
सोने और चांदी की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर MCX जैसे एक्सचेंजों पर कमोडिटी व्यापारियों और कीमती धातुओं में निवेश करने वालों पर पड़ता है। यह भारतीय निवेशकों के लिए उपलब्ध ईटीएफ (ETFs) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे सोने-समर्थित वित्तीय उत्पादों के मूल्य को भी प्रभावित करता है। सोने की ऊंची कीमतें आभूषणों की उपभोक्ता मांग और व्यापक आर्थिक भावना को भी प्रभावित कर सकती हैं।