भारतीय सर्राफा बाजार (Bullion Market) में सोना और चांदी की कीमतें फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हैं। एक तरफ जहां तकनीकी चार्ट (Technical Charts) तेजी के संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निवेशकों में डर का माहौल भी है। हालिया गिरावट अमेरिकी महंगाई दर (US Inflation Rate) और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा सितंबर में ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं की ओर इशारा कर रही है।
सोना-चांदी का क्या है हाल?
साल 2026 की शुरुआत में शानदार तेजी के बाद, कीमती धातुओं ने हाल के सत्रों में कुछ बिकवाली का दबाव देखा है। MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
टेक्निकल चार्ट क्या कहते हैं?
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि दोनों धातुओं ने हाल ही में कंसॉलिडेशन (Consolidation) के दौर से बाहर निकलकर ब्रेकआउट (Breakout) किया है, जो आमतौर पर ऊपर की ओर रुझान जारी रहने का संकेत देता है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, सोना ₹1,60,000 और चांदी ₹2,51,000 के स्तर तक जा सकती है। ये अनुमान डिसेंडिंग ट्रायंगल (Descending Triangle) चार्ट पैटर्न पर आधारित हैं, जो ऐतिहासिक रूप से बाजार की गति में सकारात्मक बदलाव का संकेत देते हैं।
फंडामेंटल डर का कारण?
हालांकि, बाजार की मौजूदा हकीकत इन तकनीकी संकेतों से अलग है। निवेशक इन संकेतों का मूल्यांकन जुलाई के लिए 3.4% के अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति (Consumer Inflation) के आंकड़ों के आधार पर कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व की सितंबर की बैठक में 25-बेसिस-पॉइंट की ब्याज दर वृद्धि की संभावना 40% तक पहुंच गई है। इससे सोने जैसी नॉन-इंटरेस्ट-बेयरिंग (Non-Interest-Bearing) संपत्तियों की अपील कम हो जाती है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें बॉन्ड या बचत खातों जैसे सुरक्षित निवेशों को अधिक आकर्षक बना देती हैं।
मुनाफावसूली और मांग में कमी
इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में आई तेज कीमतों के बाद कमोडिटी बाजार (Commodities Market) में मुनाफावसूली (Profit-Booking) भी देखी जा रही है। निचले स्तरों पर खरीदारी करने वाले निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित कर रहे हैं, जो हालिया गिरावट में योगदान दे रहा है। साथ ही, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी की मांग में भी पिछले वर्षों की तुलना में कमी आई है, जो धातु की कीमतों के लिए एक प्रमुख समर्थक कारक को हटा देता है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर
भू-राजनीतिक अनिश्चितता, जो पारंपरिक रूप से सोने के लिए एक सुरक्षित-haven संपत्ति के रूप में समर्थन करती है, ने भी अप्रत्याशित बाजार की स्थितियां पैदा की हैं। मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में जारी तनाव और बातचीत में गतिरोध का मतलब है कि बाजार की भावना खबरों के आधार पर तेजी से बदल सकती है, जिससे अल्पकालिक अस्थिरता (Short-Term Volatility) पैदा हो रही है जो हमेशा मानक तकनीकी पैटर्न का पालन नहीं करती है।
आगे क्या?
निवेशक आगामी अमेरिकी आर्थिक डेटा पर नजर रखेंगे। मुद्रास्फीति के आंकड़ों में कोई भी बदलाव या फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयान ब्याज दरों के दृष्टिकोण को बदल सकते हैं। बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि सोना और चांदी अपने वर्तमान समर्थन स्तरों, जैसे सोने के लिए ₹1,49,000 और चांदी के लिए ₹2,30,000 के स्तर को बनाए रख पाते हैं या नहीं। ये स्तर इस तिमाही के शेष कारोबारी सत्र के लिए अंतर्निहित भावना के प्रमुख संकेतक बने रहेंगे।
