MCX पर गोल्ड और सिल्वर के दाम में हालिया **2.2%** की गिरावट के बाद बाजार दबाव में है। निवेशक अब **11 सितंबर** को आने वाले US महंगाई (CPI) रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जो ब्याज दरों की दिशा तय करेगा।
US महंगाई डेटा क्यों है अहम?
US CPI रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के अगले कदमों के लिए एक प्रमुख संकेतक है। हाल ही में फेडरल रिजर्व चेयर केविन वॉर्श के बयानों ने मार्केट को सतर्क कर दिया है, क्योंकि महंगाई अभी भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो गोल्ड पर दबाव देखने को मिलता है क्योंकि गोल्ड में बैंक डिपॉजिट जैसा कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है।
टेक्निकल लेवल्स और जोखिम
मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, गोल्ड के लिए ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, चांदी के लिए ₹2.31 लाख प्रति किलो का सपोर्ट लेवल काफी अहम है। जानकारों का कहना है कि इस दौरान मार्जिन ट्रेडिंग करने वालों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि हाई वोलेटिलिटी में नुकसान का रिस्क बढ़ जाता है।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
एक तरफ जहां US महंगाई का साया है, वहीं दूसरी तरफ सेंट्रल बैंक की खरीदारी ने सोने को एक मजबूत आधार दिया है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार 21वें महीने खरीदारी करते हुए 20 टन सोना अपने रिजर्व में जोड़ा है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव भी क्रूड ऑयल और महंगाई को प्रभावित कर रहा है, जो गोल्ड के आउटलुक को और जटिल बना रहा है।
निवेशकों के लिए सलाह
निवेशकों की नजर 11 सितंबर को आने वाले अमेरिकी आंकड़ों पर होनी चाहिए। तब तक, डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड्स में होने वाला हर छोटा बदलाव गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है।
