US डॉलर की बढ़ती मजबूती और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के कारण 7 अक्टूबर, 2026 को Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ गई है।
बाजार में सुस्ती के मुख्य कारण
7 अक्टूबर, 2026 को प्रीशियस मेटल्स में बिकवाली का दबाव देखा गया। MCX पर दिसंबर गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट्स 0.52% की गिरावट के साथ ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे हैं। वहीं, चांदी में और भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जहां कीमतें 1.12% फिसलकर ₹2.24 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। डॉलर की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए इन धातुओं को महंगा बना दिया है, जिससे इनकी 'सेफ एसेट' के तौर पर मांग कम हो गई है।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
बुधवार के कारोबारी सत्र में Brent क्रूड $100 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जो महंगाई की चिंता को और बढ़ा रहा है। अब निवेशकों की नजर US Federal Reserve की मीटिंग मिनट्स पर टिकी है। बाजार यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या महंगाई को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने-चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि सरकारी बॉन्ड्स जैसे विकल्प बेहतर रिटर्न देने लगते हैं।
गोल्ड-सिल्वर रेश्यो और घरेलू मांग
गोल्ड-सिल्वर रेश्यो वर्तमान में 68:1 पर पहुंच गया है, जो ऐतिहासिक औसत 60:1 से काफी अधिक है। हालांकि कुछ जानकार चांदी को सस्ता मान सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की औद्योगिक मांग और निवेश का गणित अलग है, इसलिए इसे सिर्फ रेश्यो के आधार पर देखना जोखिम भरा हो सकता है।
भारत में फेस्टिव सीजन और शादियों का दौर होने के बावजूद, रिकॉर्ड हाई कीमतों के कारण खुदरा खरीदार थोड़े सतर्क नजर आ रहे हैं। अब निवेशकों को Reserve Bank of India की पॉलिसी, क्रूड ऑयल के उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
