सोने और चांदी की कीमतों में पिछले हफ्ते बड़ी गिरावट देखी गई। MCX पर सोना **₹1,44,000** प्रति 10 ग्राम और चांदी **₹2,23,000** प्रति किलो पर बंद हुई। डॉलर के मजबूत होने और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बदलती उम्मीदों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाए रखा है।
क्या हुआ?
पिछले हफ्ते भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों, दोनों में सोने और चांदी की कीमतों पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अगस्त डिलीवरी के लिए गोल्ड फ्यूचर्स 2.06% गिरकर ₹1,44,000 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं, सितंबर डिलीवरी के लिए सिल्वर फ्यूचर्स में 6.4% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹2,23,000 प्रति किलो पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी यही कमजोरी देखने को मिली। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर Comex गोल्ड फ्यूचर्स 3.5% घटकर $4,096.3 प्रति औंस रहा, जबकि चांदी की कीमतों में 10.7% की भारी गिरावट आई और यह $59.67 प्रति औंस पर आ गई। शुक्रवार को अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के बाद थोड़ी रिकवरी देखने को मिली, लेकिन हफ्ते का कुल ट्रेंड नकारात्मक ही रहा।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। सोना और चांदी डॉलर में ट्रेड होते हैं। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए ये कीमती धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे आमतौर पर इनकी मांग घट जाती है।
इसके अलावा, जब डॉलर मजबूत होता है, तो निवेशक अक्सर सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों के बजाय नकदी या डॉलर-आधारित संपत्तियों को प्राथमिकता देते हैं। इस बदले हुए रुझान ने बुलियन बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ाया है।
क्यों मायने रखते हैं आर्थिक आंकड़े?
निवेशक अब आगामी अमेरिकी आर्थिक रिपोर्टों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, खासकर नॉन-फार्म पेरोल और मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) डेटा। ये इंडिकेटर इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर रुख को प्रभावित करते हैं।
अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत ग्रोथ और कम बेरोजगारी दिखाती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को कम करने के दबाव में कम महसूस कर सकता है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक होती हैं क्योंकि वे सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्ति को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) को बढ़ा देती हैं।
भू-राजनीति और महंगाई से बचाव
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने के लिए एक सहायक कारक के रूप में काम करते हैं, लेकिन हाल के दिनों में इसका असर कम रहा है। इस अनिश्चितता के दौर में अमेरिकी डॉलर ने पसंदीदा सुरक्षित-आश्रय संपत्ति (safe-haven asset) के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है, जिसने सोने की पारंपरिक भूमिका को फीका कर दिया है।
इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10% की गिरावट आई है। चूंकि कच्चा तेल महंगाई का एक प्रमुख घटक है, इसलिए इसकी कीमत में गिरावट से बढ़ती लागतों की चिंताएं कम हुई हैं। जब महंगाई की उम्मीदें कम होती हैं, तो सोने की महंगाई से बचाव (inflation hedge) के रूप में अपील भी कम हो जाती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आगे चलकर, कीमती धातुओं की कीमतों की दिशा आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। इन पर नजर रखनी चाहिए:
- US नॉन-फार्म पेरोल: यह डेटा अमेरिकी श्रम बाजार के स्वास्थ्य के बारे में सुराग देगा और फेडरल रिजर्व की नीतिगत फैसलों को प्रभावित करेगा।
- मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI: ये आंकड़े बाजार को अमेरिकी आर्थिक गतिविधि की गति को समझने में मदद करेंगे।
- US ट्रेजरी यील्ड्स: यील्ड्स में वृद्धि आम तौर पर सोने और चांदी से पैसा खींचती है।
- सेंट्रल बैंक की गतिविधि: केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी एक सहायक कारक बनी हुई है, जिस पर निवेशक ट्रेंड में किसी भी बदलाव के लिए नजर रखते हैं।
