US Bond Yields में बढ़त और डॉलर की मजबूती के कारण Gold और Silver पर दबाव बढ़ गया है। निवेशक अब फेडरल रिजर्व की अगली चाल और सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने के लिए अहम US लेबर डेटा का इंतजार कर रहे हैं।
फिलहाल सोने और चांदी के लिए ग्लोबल मार्केट में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। जैसे-जैसे US इकॉनमी के मजबूत संकेत मिल रहे हैं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में तेजी आ रही है। चूंकि सोने और चांदी पर कोई ब्याज (Interest) नहीं मिलता, इसलिए निवेशकों का झुकाव फिक्स्ड-इनकम एसेट्स की तरफ बढ़ रहा है।
बॉन्ड यील्ड्स का असर
10-वर्षीय US बॉन्ड यील्ड 2007 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है, जबकि 30-वर्षीय यील्ड 2004 के स्तरों पर पहुंच गई है। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स का 101 के ऊपर बने रहना कमोडिटी की कीमतों को वैश्विक खरीदारों के लिए महंगा बना रहा है।
गोल्ड बनाम जियोपॉलिटिकल टेंशन
एक तरफ पश्चिमी एशिया और यूक्रेन में जारी तनाव के चलते सोना एक 'सेफ-हेवन' के तौर पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें इसकी कीमतों पर हावी हैं। मौजूदा समय में बाजार ब्याज दरों के असर को ग्लोबल रिस्क से कहीं ज्यादा तवज्जो दे रहा है।
सिल्वर की दोहरी मार
चांदी को इस गिरावट में इंडस्ट्रियल डिमांड की कमी का भी सामना करना पड़ा है। मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने के कारण औद्योगिक मांग में सुस्ती सीधे इसके भाव को प्रभावित कर रही है। पिछले एक हफ्ते में सिल्वर की कीमतों में 3% तक की गिरावट देखी गई है।
निवेशकों की नजर कहां है?
आने वाले दिनों में अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स (Non-farm payrolls) डेटा सबसे महत्वपूर्ण होगा। अगर लेबर मार्केट में सुस्ती आती है, तो सोने-चांदी को सहारा मिल सकता है, लेकिन मजबूत आंकड़े मेटल कीमतों पर दबाव बरकरार रख सकते हैं।
