10 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के नाकाम होने से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका असर कीमती धातुओं पर पड़ा है। निवेशक अब इन भू-राजनीतिक तनावों पर नजर रख रहे हैं कि ये कमोडिटी बाजारों और घरेलू कीमतों को कैसे प्रभावित करते हैं।
सोने-चांदी में आई गिरावट
10 जुलाई, 2026 को अंतरराष्ट्रीय ट्रेड में कीमती धातुओं में मामूली गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड की कीमतें 0.11% गिरकर $4,136.20 प्रति औंस पर आ गईं, वहीं चांदी 0.16% लुढ़ककर $60.65 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के नाकाम होने की खबरों के बाद आई है। ऐसी खबरें अक्सर निवेशकों को अमेरिकी डॉलर में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करती हैं।
डॉलर की मजबूती का धातुओं पर असर
जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या बातचीत अटक जाती है, तो अमेरिकी डॉलर में मजबूती आती है, क्योंकि दुनिया भर के निवेशक इसे एक सुरक्षित निवेश मानते हैं। चूंकि सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में तय होती हैं, डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं। यही वजह है कि डॉलर के मजबूत होने पर सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बनता है।
भारतीय बाजार का हाल
भारतीय बाजार में, कमोडिटी की कीमतें अक्सर अंतरराष्ट्रीय रुझानों के साथ-साथ घरेलू मांग को भी दर्शाती हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अगस्त महीने के लिए गोल्ड फ्यूचर 9 जुलाई को पिछली ट्रेडिंग में 0.03% के मामूली उछाल के साथ ₹1,45,350 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए थे। इसी तरह, सितंबर महीने के लिए सिल्वर फ्यूचर भी 0.03% बढ़कर ₹2,26,450 प्रति किलोग्राम पर बंद हुए थे।
हालांकि आज अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन भारतीय बाजार में फिजिकल गोल्ड (जैसे 24-कैरेट, 22-कैरेट और 18-कैरेट) की खुदरा कीमतें अक्सर प्रमुख शहरों में अलग-अलग होती हैं। ये खुदरा कीमतें स्थानीय आयात शुल्क, राज्य-स्तरीय टैक्स और मौसमी मांग जैसे कारकों से प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से कभी-कभी घरेलू कीमतों में अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स से भिन्नता देखी जाती है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
कमोडिटी मार्केट को ट्रैक करने वाले निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण कारक जारी भू-राजनीतिक स्थिति है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर सहमति न बन पाना एक अहम पहलू है जो कीमती धातुओं की कीमतों में अस्थिरता बनाए रख सकता है। इसके अलावा, निवेशकों को वैश्विक ब्याज दरों की नीतियों में किसी भी बदलाव और केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद पर भी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये दोनों ही सोने और चांदी के मूल्यांकन को लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। अगले कुछ दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के ये रुझान घरेलू खुदरा और फ्यूचर मार्केट में कैसे दिखाई देते हैं।
