गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को भारतीय बाज़ार में सोने और चांदी के वायदा भावों (Futures prices) में हल्की गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली (Profit-booking) की। यह नरमी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले आई है।
Detailed Coverage
वायदा बाज़ार में नरमी, क्यों?
गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स में 0.44% की गिरावट आई और यह ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, सितंबर सिल्वर फ्यूचर्स भी 0.50% फिसलकर ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया।
यह गिरावट बुधवार को स्पॉट मार्केट (Spot Market) में आई बड़ी तेजी के बाद आई है। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को सोना ₹1,900 और चांदी ₹8,500 महंगी हुई थी। विश्लेषकों का कहना है कि यह मौजूदा गिरावट हफ्ते की शुरुआत में आई तेज उछाल के बाद एक स्वाभाविक करेक्शन (Correction) है।
ग्लोबल फैक्टर और ब्याज दरों का असर
बाज़ार की चाल पर अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की पॉलिसी मीटिंग का असर दिख रहा है। हालांकि, ब्याज दरों में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन फेडरल रिजर्व का भविष्य की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) पर कमेंट्री कीमती धातुओं के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रिगर होगा। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सोने पर दबाव आता है क्योंकि यह कोई ब्याज नहीं देता, जिससे यह सरकारी बॉन्ड जैसी यील्ड-बेयरिंग एसेट्स की तुलना में कम आकर्षक हो जाता है।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions) कमोडिटी बाज़ार को प्रभावित कर रहा है। इन अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकती है। बढ़ती महंगाई अक्सर सेंट्रल बैंकों को सख्त ब्याज दर नीतियां बनाए रखने के लिए मजबूर करती है, जिससे सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स पर दबाव पड़ता है।
औद्योगिक मांग और अस्थिरता
सोना सुरक्षित-संपत्ति (Safe-haven asset) होने के कारण अस्थिरता के दौर में पसंदीदा रहता है। वहीं, चांदी की कीमत औद्योगिक अनुप्रयोगों (Industrial applications) में इसके व्यापक उपयोग के कारण आर्थिक विकास के अनुमानों और विनिर्माण मांग (Manufacturing demand) के प्रति अधिक संवेदनशील है। यही कारण है कि चांदी में सोने की तुलना में अधिक अस्थिरता (Volatility) देखी जाती है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के जितेन त्रिवेदी का कहना है कि अल्पावधि में मुनाफावसूली के बावजूद, कमजोर रुपए और लगातार सेफ-हेवन बाइंग के कारण सोने को सपोर्ट मिल रहा है। उनका अनुमान है कि MCX गोल्ड निकट भविष्य में ₹1.42 लाख और ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार करेगा। वहीं, चॉइस ब्रोकिंग के आमिर मखदा का कहना है कि ट्रेडर MCX गोल्ड के लिए एक प्रमुख सपोर्ट लेवल के तौर पर 20-दिन के एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज (20-day EMA) पर नज़र रख रहे हैं। बाज़ार 29 जुलाई को फेडरल रिजर्व के बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर की दिशा पर आधिकारिक अपडेट का इंतज़ार करेगा, जो बुलियन की अगली कीमत की दिशा तय करेंगे।
