Gold और Silver ने दी शेयर बाजार को मात, पिछले 1 साल में निवेशकों को मिला तगड़ा रिटर्न

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gold और Silver ने दी शेयर बाजार को मात, पिछले 1 साल में निवेशकों को मिला तगड़ा रिटर्न

पिछले 12 महीनों में कीमती धातुओं ने भारतीय इक्विटी इंडेक्स को पीछे छोड़ दिया है। 9 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड और सिल्वर ने बाजार की गिरावट में एक सुरक्षित सहारा (hedge) के रूप में काम किया है।

बीते एक साल में भारतीय निवेश परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहाँ शेयर बाजार अस्थिरता से जूझ रहा था, वहीं गोल्ड और सिल्वर ने निवेशकों को राहत पहुँचाई है। खास तौर पर सितंबर 2026 की बाजार गिरावट के दौरान इन धातुओं ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

गोल्ड-सिल्वर बनाम इक्विटी

पिछले 12 महीनों के दौरान गोल्ड और सिल्वर के एक्सचेंज-ट्रैडेड फंड्स (ETFs) ने 19% से लेकर 42% तक का रिटर्न दिया है। इसके विपरीत, BSE Sensex और Nifty 50 को लगातार मासिक गिरावट और दबाव का सामना करना पड़ा। यह ट्रेंड बताता है कि जब लिक्विडिटी की कमी होती है, तब कमोडिटी पोर्टफोलियो के लिए एक अच्छे हेज (hedge) का काम करती है।

औद्योगिक मांग और रिस्क

सिल्वर की कीमत गोल्ड के मुकाबले अधिक संवेदनशील है, क्योंकि इसका उपयोग सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी होता है। हालांकि, हालिया तेजी के बावजूद शॉर्ट-टर्म रिस्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अक्टूबर 2026 से पहले के 30 दिनों में गोल्ड ETF में 3.9% और सिल्वर ETF में 6.9% तक की गिरावट देखी गई थी।

ग्लोबल फैक्टर्स का असर

कीमती धातुओं की चाल पूरी तरह से अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड और US फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की नीति पर निर्भर करती है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो गोल्ड और सिल्वर पर दबाव बनता है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल पिछले आंकड़ों पर निर्भर न रहें और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल हालातों पर पैनी नजर बनाए रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.