US जॉब डेटा के दबाव के बावजूद भारत में Gold और Silver के फ्यूचर्स अपने अहम सपोर्ट लेवल को बचाए हुए हैं। सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना के बीच निवेशक सावधानी बरत रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के बावजूद भारत में Gold और Silver के फ्यूचर्स अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। फिलहाल, अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम और दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,32,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं। ट्रेडर्स की नजरें इन भावों पर टिकी हैं क्योंकि मार्केट ग्लोबल इकोनॉमिक ट्रेंड्स और लोकल प्राइसेस के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है।
क्यों बढ़ रही है मार्केट में हलचल?
इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह अमेरिका के ताजा जॉब डेटा हैं। अगस्त में वहां 1,62,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं, जो उम्मीदों से काफी बेहतर हैं। मजबूत लेबर मार्केट का मतलब है कि वहां महंगाई बनी रह सकती है, जिसके चलते मार्केट अब यह मानकर चल रहा है कि सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 60% तक पहुंच गई है। जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिसका सीधा दबाव Gold और Silver जैसे नॉन-इंटरेस्ट पेइंग एसेट्स पर पड़ता है।
सपोर्ट लेवल क्यों हैं महत्वपूर्ण?
मार्केट की भाषा में, मौजूदा कीमतें 'सपोर्ट जोन' का काम कर रही हैं। गोल्ड के लिए ₹1,50,000 का स्तर पिछले 50 दिनों के औसत के करीब है। अगर कीमती धातुएं इन लेवल को डिफेंड कर लेती हैं, तो यह मार्केट में स्थिरता का संकेत हो सकता है। लेकिन अगर ये सपोर्ट टूटते हैं, तो बिकवाली का नया दौर आ सकता है, जो Gold को ₹1,44,000 और Silver को ₹2,25,000 तक नीचे ले जा सकता है।
अब निवेशकों की निगाहें अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हैं। फेडरल रिजर्व के अधिकारी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भविष्य के फैसले डेटा-डिपेंडेंट होंगे। जब तक सितंबर की मीटिंग को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक Gold और Silver की चाल डॉलर और बॉन्ड यील्ड्स पर निर्भर रहेगी।
