डॉलर की नरमी बनी वजह
कीमती धातुओं में आई इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी है। डॉलर के 0.1% गिरने से विदेशी मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना सस्ता हो गया। इसका सीधा असर इन धातुओं की मांग पर पड़ा और कीमतों में उछाल आया।
कच्चे तेल में गिरावट का असर
इसी बीच, ऊर्जा बाजारों में भी नरमी देखी गई। WTI क्रूड फ्यूचर्स (WTI crude futures) गिरकर $95.50 प्रति बैरल पर आ गए। तेल की कीमतों में यह गिरावट महंगाई की उम्मीदों को कम कर रही है, जिसने अप्रत्यक्ष रूप से सोने-चांदी जैसी बिना यील्ड वाली एसेट्स (non-yielding assets) को सहारा दिया है। इससे रियल इंटरेस्ट रेट्स (real interest rates) की चिंताएं फिलहाल कम हुई हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और सावधानी
हालांकि, सोने की कीमतों पर कच्चे तेल का असर हमेशा सीधा नहीं होता। मौजूदा उछाल भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical hedging) से जुड़ा है। बाजार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की अटकलों पर गौर कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो सोने की सेफ-हेवन (safe-haven) अपील कम हो सकती है, जिससे इसकी कीमतों पर लगाम लग सकती है।
आगे क्या?
अगले कदम के लिए शुक्रवार को आने वाला अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा (Nonfarm Payrolls) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। अगर लेबर मार्केट का डेटा उम्मीद से बेहतर आता है, तो फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जो सोने-चांदी के लिए नकारात्मक होगा। इसके विपरीत, अगर डेटा कमजोर रहता है, तो कीमती धातुएं और ऊपर जा सकती हैं। ट्रेडर्स को 'बुल ट्रैप्स' (bull traps) से सावधान रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह बाजार लिक्विडिटी और सेंटिमेंट के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
