Gold & Silver ETFs में भारी गिरावट, IT शेयरों की बिकवाली से बाजार में हड़कंप

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold & Silver ETFs में भारी गिरावट, IT शेयरों की बिकवाली से बाजार में हड़कंप

19 जून 2026 को भारतीय बाजारों में भारी गिरावट का माहौल रहा, जिसका असर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले निवेशों पर भी पड़ा। सिल्वर ETFs में **6%** तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि गोल्ड ETFs भी **3%** से अधिक लुढ़क गए। इसकी मुख्य वजह IT शेयरों में आई बड़ी बिकवाली रही, जो ग्लोबल कंपनी Accenture के डाउनग्रेड फोरकास्ट के बाद शुरू हुई। इसी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी की लगातार बढ़त पर भी ब्रेक लग गया।

क्या हुआ?

शुक्रवार, 19 जून 2026 को भारतीय निवेशकों ने एक बड़ी गिरावट देखी, जिसने सोना (Gold) और चांदी (Silver) जैसी सुरक्षित संपत्तियों को भी प्रभावित किया। इन कीमती धातुओं को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भारी गिरावट आई। सिल्वर ETFs सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जिनमें ICICI Prudential Silver ETF, HDFC Silver ETF और UTI Silver ETF जैसे फंड्स में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई। गोल्ड ETFs पर भी दबाव देखा गया, ICICI Prudential Gold ETF करीब 3.5% और Invesco India Gold ETF 3.2% नीचे आ गए।

इसी के साथ, भारतीय शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट आई। BSE सेंसेक्स 1.07% गिरकर इंट्राडे में 76,578.08 के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 0.95% लुढ़ककर 23,938.75 पर आ गया। दोनों सूचकांकों की लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला यहीं थम गया।

निवेशकों के लिए क्यों है अहम?

बाजार में इस गिरावट का तत्काल ट्रिगर ग्लोबल IT फर्म Accenture द्वारा अपने रेवेन्यू ग्रोथ फोरकास्ट को घटाना रहा। भारतीय शेयर सूचकांकों में IT सेक्टर का बड़ा वेटेज होने के कारण, ऐसी बड़ी कंपनी की नकारात्मक खबर अक्सर पूरे बाजार में बिकवाली को बढ़ावा देती है।

हालांकि, सोने और चांदी जैसी संपत्तियों में एक साथ आई गिरावट एक अहम निवेशक संकेत है। अक्सर इन कीमती धातुओं को बाजार की अस्थिरता के खिलाफ एक हेज (hedge) के तौर पर देखा जाता है, लेकिन ये लिक्विडिटी (liquidity) के झटकों से अछूती नहीं हैं। जब निवेशकों को अपने इक्विटी पोर्टफोलियो में अचानक नुकसान होता है, तो वे अक्सर नकदी जुटाने या मार्जिन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी सबसे लिक्विड या लाभदायक संपत्तियों - जिनमें गोल्ड और सिल्वर ETFs भी शामिल हैं - को बेच देते हैं। यह 'रिस्क-ऑफ' (risk-off) व्यवहार, जहां निवेशक अनिश्चितता के दौरान लगभग सभी एसेट क्लास में अपना एक्सपोजर कम कर देते हैं, कीमती धातु ETFs में गिरावट का मुख्य कारण प्रतीत होता है।

व्यापक कारोबारी संदर्भ

कई कारकों ने मिलकर इस नकारात्मक सेंटिमेंट को हवा दी। IT सेक्टर में मंदी के साथ-साथ, मध्य पूर्व में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता का माहौल बनाया है। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे तनाव अक्सर निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित करते हैं, लेकिन इस विशिष्ट मामले में, तत्काल नकदी की आवश्यकता और मुनाफावसूली की प्रवृत्ति ने सुरक्षित-संपत्ति की मांग पर हावी होती दिखी। इसके अतिरिक्त, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर अक्सर इस मुद्रा में मूल्यवान कमोडिटीज पर दबाव डालता है, क्योंकि यह वैश्विक खरीदारों के लिए उन्हें महंगा बना देता है, जिससे मांग और कम हो जाती है।

निवेशक इसे कैसे समझें?

वर्तमान मूल्य चाल से पता चलता है कि बाजार प्रतिभागी लंबी अवधि के होल्डिंग के बजाय लिक्विडिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। सिल्वर और गोल्ड ETFs में निवेशकों के लिए, कमोडिटी बाजार में एक संरचनात्मक परिवर्तन और एक अस्थायी लिक्विडिटी-संचालित गिरावट के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

जबकि IT सेक्टर की खबर टेक-हैवी पोर्टफोलियो के लिए एक फंडामेंटल मुद्दा है, कीमती धातुओं का मूवमेंट अक्सर वैश्विक भावना और मुद्रा में उतार-चढ़ाव का अधिक प्रतिबिंब होता है। निवेशकों को यह मूल्यांकन करना चाहिए कि इन ETFs में उनका एक्सपोजर लंबी अवधि के पोर्टफोलियो विविधीकरण के लिए है या अल्पकालिक ट्रेडिंग के लिए। उच्च अस्थिरता की अवधि के दौरान, व्यापक बाजार की बिकवाली अक्सर उन संपत्तियों को प्रभावित कर सकती है जो अन्यथा फंडामेंटली मजबूत हों।

आगे क्या देखना चाहिए?

निवेशक बाजार की अगली चाल को समझने के लिए कई कारकों पर बारीकी से नजर रख सकते हैं। पहला, IT सेक्टर की रिकवरी या स्थिरता सूचकांकों के लिए महत्वपूर्ण होगी। दूसरा, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स की निगरानी करें, क्योंकि इसकी मजबूती या कमजोरी सीधे सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करती है। तीसरा, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक विकास की तीव्रता का अवलोकन करें; कोई भी वृद्धि या कमी कीमती धातुओं के संबंध में सेंटिमेंट को तेजी से बदल सकती है। अंत में, अन्य प्रमुख IT खिलाड़ियों से किसी भी आगे की कंपनी-विशिष्ट गाइडेंस पर ध्यान दें, क्योंकि यह स्पष्ट करेगा कि Accenture का फोरकास्ट एक अलग घटना है या सेक्टर में व्यापक मंदी का संकेत है।

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