Gold Price: मिडल ईस्ट टेंशन से तेल $100 के पार, डॉलर मजबूत; सोने में आई भारी गिरावट!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold Price: मिडल ईस्ट टेंशन से तेल $100 के पार, डॉलर मजबूत; सोने में आई भारी गिरावट!
Overview

एशियाई बाजारों में गुरुवार को मिली-जुली चाल देखने को मिली। मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते तेल की कीमतें **$100** प्रति बैरल के पार निकल गईं और डॉलर भी मजबूत हुआ। वहीं, हैरानी की बात ये है कि इन सब के बावजूद सोने (Gold) की कीमतों में भारी गिरावट आई है।

मिडल ईस्ट संघर्ष का बड़ा असर: एनर्जी और डॉलर में तेजी

मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष चौथे हफ्ते में पहुँच गया है और इसने ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स पर गहरा असर डाला है। Brent Crude फ्यूचर्स $103 प्रति बैरल के करीब पहुँच गए हैं, जो इस महीने की बड़ी मजबूती की ओर इशारा कर रहा है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों ने महंगाई (Inflation) की चिंताओं को फिर से हवा दी है और सेंट्रल बैंक्स को अपनी पॉलिसी पर फिर से विचार करने पर मजबूर किया है। ग्लोबल अनिश्चितता के बीच निवेशक अमेरिकी डॉलर (US Dollar) को सुरक्षित मानकर उसमें पैसा लगा रहे हैं, जिससे डॉलर और मजबूत हुआ है।

एशियाई मार्केट्स में दिखी मिला-जुला असर, महंगाई की चिंताएं बरकरार

क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद, कुछ एशियाई बाजारों ने अप्रत्याशित मजबूती दिखाई है। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स हाल ही में 10.37% चढ़ा, जिसका एक कारण राजनीतिक स्थिरता रहा। वहीं, साउथ कोरिया का KOSPI इंडेक्स हाल ही में 6,000 पॉइंट्स के पार निकला, जिसमें AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर्स का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, MSCI Asia-Pacific ex-Japan इंडेक्स अक्टूबर 2022 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है।

सोने में अप्रत्याशित गिरावट ने निवेशकों को चौंकाया

एक बिलकुल उलट ट्रेंड सोने (Gold) के प्रदर्शन में देखा गया है। यह कीमती धातु लगभग 14.5% की भारी मासिक गिरावट के साथ लगभग $4,514 प्रति औंस पर आ गई है। यह तब हुआ जब मिडल ईस्ट में तनाव बढ़ा हुआ था, एक ऐसी स्थिति में जहाँ आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) के तौर पर चमकता है। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई की चिंताओं और रियल यील्ड्स (Real Yields) के बढ़ते जाने की उम्मीद के चलते निवेशक ऊर्जा संपत्तियों (Energy Assets) और डॉलर को तरजीह दे रहे हैं। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) ने भी बढ़ती महंगाई के संकेत दिए हैं, अपना महंगाई अनुमान बढ़ाकर 2.6% कर दिया है, जबकि GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 0.9% किया है। इसी तरह, फेडरल रिजर्व (Fed) भी 2.7% के आसपास महंगाई का अनुमान लगा रहा है। इन वजहों से मार्केट्स ने इस साल रेट कट्स की उम्मीदें लगभग खत्म कर दी हैं।

एनर्जी कंपनियाँ और ब्रोकरेज फर्म्स की राय

विश्लेषकों ने अमेरिकी रिफाइनरी कंपनियों जैसे Valero Energy, HF Sinclair और Marathon Petroleum को मजबूत परफॉर्मेंस के लिए सराहा है, जिनका P/E रेश्यो 14-16 के बीच है। जियोपॉलिटिकल रिस्क के समय रिफाइनरी की मजबूती से इन्हें फायदा हो रहा है। Mizuho का अनुमान है कि आने वाले समय में ऑयल मार्केट में रिकवरी आ सकती है, हालांकि नज़दीकी भविष्य में चुनौतियाँ बनी रहेंगी।

सेंट्रल बैंक्स सतर्क: महंगाई पर नजर, रेट कट्स पर लगाम

मार्केट का मिडल ईस्ट संघर्ष पर रिस्पॉन्स एक पारंपरिक रिस्क हेजिंग (Risk Hedging) से हटकर हो रहा है। सोने की शार्प गिरावट, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, यह दिखाती है कि महंगाई की चिंताएं और डॉलर की मजबूती सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स की मांग पर हावी हो गई हैं। इससे उन निवेशकों को नुकसान हो रहा है जिन्होंने युद्ध के खतरे से बचाव के लिए सोने में निवेश किया था। जो एशियाई इकोनॉमी ऊर्जा आयात और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे शिपिंग रूट्स पर बहुत निर्भर हैं, वे एनर्जी प्राइस वोलेटिलिटी से ज्यादा जोखिम में हैं। हालांकि Nikkei और KOSPI जैसे इंडेक्स घरेलू फैक्टर्स जैसे AI और सेमीकंडक्टर्स की वजह से मजबूत हुए हैं, लेकिन उनका लॉन्ग-टर्म आउटलुक मिश्रित है। उदाहरण के लिए, KOSPI के अगले 12 महीनों में 4657.33 तक गिरने का अनुमान है, जो हालिया उछाल के बावजूद भविष्य में कमजोरी का संकेत देता है।

सेंट्रल बैंक्स सतर्क हैं: ECB ने रेट्स स्थिर रखे लेकिन महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया, और फेडरल रिजर्व ने भी हाई इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशन्स के बीच रेट कट्स को रोक दिया है। विश्लेषकों का सुझाव है कि एनर्जी रिस्क और सीमित पॉलिसी विकल्पों के कारण ब्रॉडर एशियाई मार्केट्स के लिए सावधानी बरतना जरूरी है, हालांकि कुछ खास सेक्टर्स अभी भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। मार्केट्स फिलहाल भू-राजनीतिक झटकों पर अपनी प्रतिक्रिया को एडजस्ट कर रहे हैं, पारंपरिक सेफ हेवन के बजाय इन्फ्लेशन हेजेज और रेजिलिएंट एसेट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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