भारत में सोने की कीमतें फिलहाल **₹1.44 लाख** से **₹1.48 लाख** प्रति 10 ग्राम के दायरे में बनी हुई हैं। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार में त्योहारी और शादी-ब्याह की मांग ने इसे एक मजबूत सपोर्ट (Floor) दे रखा है।
फिलहाल भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में एक कंसोलिडेशन (Consolidation) का दौर चल रहा है। कई निवेशक यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सोना ₹1.25 लाख के स्तर तक नीचे आ सकता है, लेकिन मौजूदा मैक्रो-इकोनॉमिक हालातों में इतनी बड़ी गिरावट की संभावना काफी कम दिखती है।
ग्लोबल दबाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व
ग्लोबल मार्केट में सोने की चाल सीधे तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की नीतियों से तय होती है। जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई काबू करने के लिए ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखता है, तो US ट्रेजरी बॉन्ड्स पर रिटर्न बढ़ जाता है। चूँकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए निवेशक अपना पैसा बॉन्ड्स में शिफ्ट कर देते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बनता है।
भारतीय बाजार में 'शॉक एब्जॉर्बर'
भारतीय बाजार के लिए दो बड़े फैक्टर्स सुरक्षा कवच का काम कर रहे हैं:
- इंपोर्ट ड्यूटी: सोने पर 15% की इंपोर्ट ड्यूटी स्थानीय कीमतों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के झटकों से सीधे प्रभावित होने से बचाती है।
- त्योहारी और शादी की मांग: भारत में नवरात्रि, दिवाली और शादी के सीजन के चलते फिजिकल गोल्ड की डिमांड लगातार बनी हुई है। यह मांग कीमतों के लिए एक 'शॉक एब्जॉर्बर' का काम करती है, जो घरेलू दरों में बड़ी गिरावट को रोकने में मदद करती है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी
दुनियाभर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को डायवर्सिफाई करने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं। यह संस्थागत खरीदारी (Institutional Buying) सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत सपोर्ट लेवल तैयार करती है, जिससे किसी भी तरह की बड़ी गिरावट को संभालना मुश्किल होता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को अब अमेरिका के अक्टूबर महंगाई डेटा और मिडिल ईस्ट की भू-राजनीतिक स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो 'सेफ-हेवन' (Safe-haven) एसेट के रूप में सोने की डिमांड में अचानक तेजी आ सकती है। एक्सपर्ट्स इसे कोई बड़ी गिरावट नहीं, बल्कि लंबी तेजी के बाद एक 'हेल्थी करेक्शन' के तौर पर देख रहे हैं।
