शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का फ्यूचर ₹1,205 बढ़कर ₹1,59,700 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी ₹1,745 चढ़कर ₹2,44,988 प्रति किलोग्राम हो गई। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका से बढ़ी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को कीमती धातुओं की ओर धकेला है। हालांकि यह मजबूत मांग को दर्शाता है, लेकिन इतने ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद भारत में फिजिकल मांग में नरमी आ सकती है।
सोने-चांदी में तूफानी तेजी, क्यों?
शुक्रवार को कीमती धातुओं ने ज़बरदस्त उछाल दिखाया, क्योंकि बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों ने सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स (Assets) की ओर अपना रुख किया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के अक्टूबर अनुबंध (October Contract) में ₹1,205 की बढ़ोतरी हुई और यह ₹1,59,700 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करने लगा। इसी तरह, चांदी के सितंबर अनुबंध (September Contract) में ₹1,745 का उछाल देखा गया और यह ₹2,44,988 प्रति किलोग्राम के स्तर पर खुला।
भू-राजनीतिक तनाव का असर
इस तेजी के पीछे मुख्य वजह भू-राजनीतिक तनाव का बढ़ना है। निवेशक ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों (U.S. Sanctions) को लेकर चिंतित हैं। ईरान कच्चे तेल (Crude Oil) का एक अहम उत्पादक है, और किसी भी तरह की रुकावट या नीतिगत बदलाव से तेल की कीमतें अक्सर बढ़ जाती हैं। जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई (Inflation) बढ़ने का डर पैदा होता है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर सोना और चांदी की ओर रुख करते हैं, क्योंकि उन्हें इन्हें बढ़ती महंगाई और वित्तीय अस्थिरता के खिलाफ एक ढाल के रूप में देखा जाता है।
भारत में फिजिकल डिमांड पर असर
जहां फ्यूचर मार्केट में यह तेजी निवेशकों की भावना को दर्शाती है, वहीं यह जानना भी ज़रूरी है कि इसका असल बाज़ार पर क्या असर पड़ता है। भारत, जो सोने का एक बड़ा उपभोक्ता है, वहां इतनी तेज़ी से बढ़ती कीमतों का असर खुदरा स्तर (Retail Level) पर अलग होता है। ऐतिहासिक रूप से, जब कीमतें इतनी तेज़ी से ऊपर जाती हैं, तो ज्वेलरी खरीदारों और छोटे निवेशकों से फिजिकल डिमांड (Physical Demand) अक्सर धीमी हो जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई लोग बड़ी खरीदारी करने से पहले कीमतों के स्थिर होने का इंतज़ार करना पसंद करते हैं।
संस्थागत खरीद का सपोर्ट
लगातार संस्थागत खरीद (Institutional Buying) सोने की कीमतों को संरचनात्मक समर्थन (Structural Support) प्रदान कर रही है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, खासकर चीन, सोने को अपने रिज़र्व एसेट (Reserve Asset) के रूप में रखने के लिए लगातार खरीद कर रहे हैं। यह संस्थागत प्रवृत्ति कीमतों के लिए एक दीर्घकालिक आधार बनाती है, जो फ्यूचर मार्केट में दिन-प्रतिदिन के कारोबार से उत्पन्न होने वाली अस्थिरता को संतुलित करने में मदद करती है।
आगे क्या देखें?
इस क्षेत्र पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण कारक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों की चाल और अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) की मजबूती होगी। कीमती धातुओं का आमतौर पर डॉलर के साथ विपरीत संबंध होता है; यदि वैश्विक आर्थिक नीति में बदलाव के कारण डॉलर मजबूत होता है, तो यह कभी-कभी सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, मध्य पूर्व (Middle East) की नीतियों से जुड़े कोई भी अपडेट निकट अवधि में बाज़ार की चाल के लिए एक प्रमुख ट्रिगर बने रहेंगे।
