इस तूफानी तेजी की वजह क्या है?
दरअसल, दुनिया भर में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, जिसमें ईरान और अन्य अंतरराष्ट्रीय संघर्ष शामिल हैं, निवेशकों को सोने की ओर खींच रही हैं। सोना हमेशा से संकट के समय में एक 'सेफ हेवन' (Safe Haven) यानी सुरक्षित पनाहगाह माना जाता रहा है।
इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर भी कमजोर पड़ रहा है। 29 जनवरी, 2026 को DXY इंडेक्स 96.25 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो पिछले एक साल में लगभग 10.71% गिरा है। ऐसा माना जा रहा है कि ट्रम्प प्रशासन कमजोर डॉलर से खुश हो सकता है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर-आधारित संपत्ति सस्ती हो जाती है और सोने का आकर्षण बढ़ जाता है। डॉलर और सोने की कीमतों के बीच यह उल्टा संबंध (Inverse Relationship) बाजार का एक जाना-पहचाना ट्रेंड है।
MCX और ग्लोबल मार्केट में धूम
घरेलू बाजार, यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, 5 फरवरी, 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट्स में लगभग 6% की शानदार तेजी आई। इससे भाव ₹9,954 बढ़कर ₹1,75,869 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए। चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स (मार्च 5, 2026) में भी दमदार तेजी देखी गई, जो लगभग 5% या ₹15,414 बढ़कर ₹4,00,780 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए।
यह घरेलू तेजी अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप है, जहां 29 जनवरी, 2026 को सोने के फ्यूचर्स $5,600 प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई को पार कर गए। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने और आगे बढ़ोतरी न करने के संकेतों ने भी सोने और चांदी जैसी नॉन-यील्डिंग (Non-yielding) संपत्तियों को बढ़ावा दिया है।
निवेशकों का भरोसा और भविष्य का संकेत
यह रिकॉर्ड रैली निवेशकों की गहरी सावधानी और सुरक्षा की तलाश को दर्शाती है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक भी डॉलर-आधारित संपत्तियों से अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। इतिहास गवाह है कि आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में सोना एक मजबूत मूल्य भंडार (Store of Value) साबित हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि मुनाफावसूली (Profit-taking) से अल्पकालिक गिरावट आ सकती है, लेकिन सोने का समर्थन करने वाले मूल कारक - यानी वैश्विक अस्थिरता, बढ़ता कर्ज का बोझ और मौद्रिक विश्वास का क्षरण - अभी भी बने हुए हैं।