सोने की तूफानी तेजी का कारण: टेंशन और सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी
सोने की कीमतों में इस वक्त तगड़ी तेजी देखी जा रही है, जिसकी मुख्य वजहें हैं दुनिया भर में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और महंगाई (Inflation) की चिंताएं। ऐसे माहौल में निवेशक सोने को एक भरोसेमंद 'सेफ हेवन' (Safe Haven) यानी सुरक्षित निवेश मानते हुए इसकी ओर रुख कर रहे हैं। इस ट्रेंड को सेंट्रल बैंकों की जोरदार खरीदारी ने और भी बल दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सेंट्रल बैंकों ने लगभग 863.3 टन सोना खरीदा था और 2026 में भी वे करीब 800 टन सोने की खरीदारी का अनुमान है। इसके अलावा, फिजिकल ETF में रखे सोने का कुल मूल्य फरवरी 2026 के अंत तक रिकॉर्ड $701 बिलियन तक पहुंच गया। 10 मार्च 2026 को स्पॉट गोल्ड की कीमतें $5,160 से $5,261 प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रही थीं।
चांदी का डबल रोल: इंडस्ट्री की मांग बनाम वोलेटिलिटी और सब्स्टिट्यूशन का डर
चांदी (Silver) की अहमियत सिर्फ एक कीमती धातु के तौर पर नहीं, बल्कि औद्योगिक इस्तेमाल में भी है, जो कुल वैश्विक मांग का लगभग 60% हिस्सा है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और AI जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स में चांदी की डिमांड काफी ज्यादा है। उम्मीद की जा रही है कि 2026 में चांदी की सप्लाई में लगातार छठी बार घाटा (Supply Deficit) देखा जा सकता है, जो 67 से 95 मिलियन औंस तक हो सकता है। सप्लाई की यह कमी और इन्वेस्टमेंट डिमांड के चलते जनवरी 2026 में चांदी की कीमत $121.58 के intraday high तक पहुंच गई थी। हालांकि, सोना की तुलना में चांदी ज्यादा वोलेटाइल (Volatile) है। 11 मार्च 2026 को यह $88 से $92 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी, जो जनवरी के अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। इसके अलावा, बढ़ती लागत के कारण सोलर इंडस्ट्री जैसे बड़े ग्राहक चांदी का इस्तेमाल कम करने या उसे दूसरे धातुओं से बदलने (Substitution) पर भी विचार कर सकते हैं, जो इसकी मांग के लिए एक बड़ा खतरा है।
सोने-चांदी का अनुपात (Ratio) और विश्लेषकों की राय
सोने और चांदी के भाव के अनुपात (Gold-Silver Ratio) की बात करें तो यह हाल के समय में 55-65 के बीच आ गया है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक यह 50:1 के स्तर तक भी जा सकता है। इससे पता चलता है कि हाल फिलहाल में चांदी ने औद्योगिक मांग और सप्लाई की दिक्कतों के चलते सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। फिर भी, अनिश्चित समय में एक स्थिर 'स्टोर ऑफ वैल्यू' (Store of Value) के रूप में सोने की भूमिका कम नहीं है। 2026 के लिए एनालिस्ट्स (Analysts) की राय बंटी हुई है। Macquarie ने सोने का फोरकास्ट $4,323 प्रति औंस तक बढ़ाया है, जबकि J.P. Morgan को उम्मीद है कि चांदी का औसत भाव $81 प्रति औंस रहेगा, जो 2025 के औसत से दोगुना से भी ज्यादा है।
चांदी और सोने के लिए जोखिम (Risks) और आउटलुक (Outlook)
कीमती धातुओं के लिए बाजार में सकारात्मक माहौल के बावजूद, कुछ जोखिम (Risks) बने हुए हैं। चांदी का मार्केट सोना की तुलना में छोटा है और इसके डबल रोल (औद्योगिक और कीमती धातु) के कारण इसमें कीमतों में तेज गिरावट का खतरा भी ज्यादा है। सिल्वर माइनर्स ETF जैसे SIL का P/E 30.28 और SLVP का P/E लगभग 41 है, जो निवेशकों की ऊंची उम्मीदों को दर्शाता है। अगर इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी आती है, तो ये दबाव में आ सकते हैं। सोलर सेक्टर द्वारा लागत बढ़ने पर चांदी का इस्तेमाल कम करने की कोशिशें इसकी मांग को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। वहीं, अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है या अमेरिकी डॉलर (US Dollar) बहुत मजबूत होता है, तो सोने की 'सेफ हेवन' अपील कमजोर पड़ सकती है, जिससे इसकी कीमतों में गिरावट आ सकती है। चांदी की वोलेटिलिटी का मतलब है कि तेज उछाल के बाद कीमतों में तेज गिरावट भी आ सकती है, जैसा कि 2026 की शुरुआत में देखा गया था।
भविष्य की राह: मजबूत फंडामेंटल्स पर जारी रहेगी वोलेटिलिटी
लंबे समय को देखते हुए, सोना और चांदी दोनों के लिए फंडामेंटल्स (Fundamentals) मजबूत बने हुए हैं। सेंट्रल बैंकों की ओर से अपने फॉरेन रिजर्व में विविधता लाने की कोशिशें, महंगाई की जारी चिंताएं और एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) की ओर बढ़ता दुनिया, ये सभी चांदी की मांग को बढ़ा रहे हैं। उम्मीद है कि वोलेटिलिटी, खासकर चांदी में, बनी रहेगी, लेकिन मांग के रुझान (Demand Trends) मजबूत हैं। ऐसे में निवेशक कीमतों में गिरावट के दौरान खरीदारी के मौके तलाश सकते हैं। सोना पोर्टफोलियो में एक स्थिर संपत्ति (Stable Asset) के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा, जबकि चांदी का भविष्य उसकी औद्योगिक जरूरतें और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा।