सोने में तूफानी तेजी! मिडिल ईस्ट में जंग का डर, निवेशकों का 'सेफ हेवन' पर भरोसा

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
सोने में तूफानी तेजी! मिडिल ईस्ट में जंग का डर, निवेशकों का 'सेफ हेवन' पर भरोसा
Overview

अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच चल रहे तनाव ने ग्लोबल मार्केट में खलबली मचा दी है। इसी वजह से **2 मार्च 2026** को स्पॉट गोल्ड (Gold) और सिल्वर (Silver) की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया। कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम भी बढ़े, जिसने इस तेजी को और हवा दी।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

भू-राजनीतिक तनाव के कारण कीमती धातुओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। 2 मार्च 2026 को अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में गहरी अनिश्चितता के कारण स्पॉट गोल्ड (Gold) की कीमतों में करीब 1.72% का उछाल आया, जिससे यह $5,368.09 प्रति औंस पर पहुंच गया। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) में भी 2.58% की बढ़ोतरी हुई और वे $5,382.60 पर बंद हुए। सिल्वर फ्यूचर्स (Silver Futures) ने भी बढ़त दर्ज की। इस रैली का मुख्य कारण अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले थे, जिसके बाद ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत हो गई। इस घटना ने 'सेफ हेवन' (Safe Haven) माने जाने वाले सोने की मांग को बढ़ाया। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भी तेज उछाल आया, जिसने 'रिस्क-ऑफ' (Risk-off) सेंटिमेंट को और हवा दी।

ऐतिहासिक रूप से, भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय सोने ने हमेशा मजबूत प्रदर्शन किया है। 1991 के खाड़ी युद्ध, 2003 के इराक युद्ध और 2020 के अमेरिकी-ईरानी तनाव के बाद भी सोने की कीमतों में काफी तेजी देखी गई थी। विश्लेषकों का अनुमान है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए, गोल्ड (Gold) जल्द ही ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकता है, और कुछ अनुमान तो 2026 के अंत तक इसे $5,500 से $6,300 प्रति औंस तक पहुंचा रहे हैं। रॉयटर्स (Reuters) के एक सर्वे में 2026 के लिए सोने का औसत अनुमान $4,746.50 लगाया गया है, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक है। सोने के इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे कई कारक हैं, जिनमें लगातार बने रहने वाले भू-राजनीतिक जोखिम, सेंट्रल बैंकों (Central Banks) द्वारा की जा रही भारी खरीदारी, अमेरिकी कर्ज को लेकर चिंताएं, व्यापारिक अनिश्चितताएं और डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization) की प्रवृत्ति शामिल हैं।

हालांकि, 'सेफ हेवन' का आकर्षण केवल सोने तक सीमित नहीं है। अन्य पारंपरिक सुरक्षित संपत्तियां भी पूंजी आकर्षित कर रही हैं। अमेरिकी डॉलर (US Dollar) चरम संकटों में एक प्रमुख सहारा बना रहता है, लेकिन मध्यम 'रिस्क-ऑफ' अवधियों में यह जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) के मुकाबले कमजोर पड़ सकता है, खासकर जब मौद्रिक नीति में भिन्नता या अमेरिका से जुड़ी आर्थिक चिंताएं हों। भारतीय रुपया (Indian Rupee) भी कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजार की घबराहट के चलते डॉलर के मुकाबले 91.00 के स्तर के करीब बना हुआ है। सोने और तेल की कीमतों का सह-संबंध भी दिलचस्प है; जहां दोनों सप्लाई बाधित होने के डर से बढ़ते हैं, वहीं सोना सीधे भू-राजनीतिक तनाव को अवशोषित करता है, जबकि तेल की कीमतें उपलब्धता में संभावित बदलावों से अधिक प्रभावित होती हैं।

इसके विपरीत, 2 मार्च को हुए बाजार के रिएक्शन में एक खास अंतर दिखा: जहां अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट (Spot Market) में कीमतें तेजी से बढ़ीं, वहीं भारतीय MCX गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स (MCX Gold and Silver Futures) में मामूली गिरावट दर्ज की गई। यह घरेलू बाजार में देखी गई सावधानी या हेजिंग (Hedging) की गतिविधि को दर्शाता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट की तत्काल सट्टेबाजी से अलग थी। LKP सिक्योरिटीज के जितेन त्रिवेदी जैसे विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि यह रैली तनाव कम होने (De-escalation) के संकेतों के प्रति बेहद संवेदनशील है। शांति की ओर कोई भी त्वरित कदम महत्वपूर्ण मुनाफावसूली (Profit-taking) को ट्रिगर कर सकता है, जिससे शुरुआती 3-6% की उछाल उलट सकती है। भले ही अमेरिकी डॉलर प्रणालीगत संकटों में एक प्रमुख सुरक्षित आश्रय है, लेकिन इसकी प्रमुखता को चुनौती मिल रही है; व्यापक भू-राजनीतिक तनाव के बीच येन और फ्रैंक मजबूत हो रहे हैं, जो 'सेफ हेवन' की मांग में विविधीकरण का संकेत देते हैं। सोने की चढ़ाई की निरंतरता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि तेल की कीमतों में वृद्धि स्थिर मुद्रास्फीति (Inflation) की उम्मीदों में बदलती है या केवल अल्पकालिक आपूर्ति चिंताओं की प्रतिक्रिया मात्र है; यदि बाद वाला मामला है, तो प्रत्यक्ष संघर्ष में वृद्धि के बिना सोने की ऊपर की गति कमजोर पड़ सकती है।

जब तक मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बना रहेगा, तब तक बाजार में अस्थिरता (Volatility) बने रहने की उम्मीद है। विश्लेषक अनिश्चितता के खिलाफ पोर्टफोलियो विविधीकरण (Portfolio Diversification) चाहने वाले सेंट्रल बैंकों और निवेशकों से मजबूत मांग जारी रहने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, बाजार की कूटनीतिक सफलता या तनाव बढ़ने की संभावनाओं पर पैनी नजर है, जिसका अर्थ है कि कीमती धातुओं का भविष्य अक्सर सुर्खियों से जुड़ा रहेगा, और यदि तनाव कम होने की संभावना ठोस हो जाती है तो इसमें तेजी से सुधार का महत्वपूर्ण जोखिम बना रहेगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.