सोने के भावों में तूफानी तेजी! सेंट्रल बैंकों की खरीद और तनाव के बीच ₹148,230 पर पहुंचा 24K सोना

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
सोने के भावों में तूफानी तेजी! सेंट्रल बैंकों की खरीद और तनाव के बीच ₹148,230 पर पहुंचा 24K सोना
Overview

भारत में सोने की कीमतों में आज, 3 फरवरी 2026 को, एक बार फिर शानदार तेजी देखने को मिली। 24 कैरेट सोने का भाव **₹148,230** प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो पिछले दिन के मुकाबले **₹5,340** ज्यादा है। यह उछाल दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीद और भू-राजनीतिक तनावों के कारण आया है, जिससे सोना एक सुरक्षित निवेश (safe-haven asset) के तौर पर और मजबूत हुआ है।

दाम में वृद्धि का मुख्य कारण: सुरक्षित निवेश की मांग

इस दाम में वृद्धि ने साफ कर दिया है कि मौजूदा ग्लोबल माहौल में निवेशक जोखिम भरे निवेशों से हटकर सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स (assets) की ओर रुख कर रहे हैं। 3 फरवरी 2026 को घरेलू गोल्ड मार्केट में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹148,230 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई, जो पिछले दिन की क्लोजिंग से ₹5,340 का बड़ा इजाफा दर्शाता है। इसी तरह, 22 कैरेट सोने का भाव ₹135,878 प्रति 10 ग्राम रहा। यह तेज़ी सीधे तौर पर ग्लोबल लेवल पर चल रहे भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं (geopolitical uncertainties) से जुड़ी है, जो सोने में सुरक्षित निवेश (secure store of value) की मांग को फिर से बढ़ा रही हैं। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी इस मौजूदा तेज़ी को मज़बूत आधार दे रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी अप्रैल गोल्ड फ्यूचर्स (gold futures) में दोपहर तक करीब 4% की बढ़ोतरी देखी गई।

ग्लोबल फैक्टर्स और लोकल मार्केट का विश्लेषण

भारत में सोने के दाम अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों, जैसे दुबई, की तुलना में प्रीमियम पर बने हुए हैं। 3 फरवरी 2026 को भारत में 24K सोना ₹148,230 प्रति 10 ग्राम था, जबकि दुबई में यह ₹134,374 था, जो करीब 10.31% का अंतर दिखाता है। यह प्रीमियम इम्पोर्ट ड्यूटी (import duties) और स्थानीय बाज़ार की गतिशीलता जैसे कारकों से प्रभावित होता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व (US Federal Reserve) द्वारा संभावित इंटरेस्ट रेट कट (interest rate cuts) की उम्मीदों ने भी सोने को सहारा दिया है, क्योंकि कम दरें सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (non-yielding assets) रखने की अवसर लागत (opportunity cost) को कम कर देती हैं। ऐतिहासिक रूप से, सोना आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के समय में मज़बूत सहसंबंध (strong correlation) दिखाता रहा है। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) का नाम, जिन्हें एक हॉकिश स्टांस (hawkish stance) वाला माना जाता है, भविष्य की मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) और सोने की दिशा पर असर डाल सकता है। फेड की स्वतंत्रता और अमेरिकी फिस्कल आउटलुक (fiscal outlook) को लेकर चिंताएं भी सोने के एक हेज (hedge) के रूप में आकर्षण को बढ़ा रही हैं। भले ही चांदी (silver) की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव दिखा है, सोने की सुरक्षित निवेश की स्थिति (safe-haven status) सबसे अहम बनी हुई है, जो इसके परफॉरमेंस ड्राइवर्स को अलग करती है।

भविष्य का नज़रिया: कंसोलिडेशन और सतर्कता

आगे चलकर, एनालिस्ट्स का अनुमान है कि हालिया बढ़त और प्रॉफिट-टेकिंग (profit-taking) के बाद बाज़ार में कंसोलिडेशन (consolidation) के चलते सोने की कीमतों में एक रेंज-बाउंड फेज़ (range-bound phase) आ सकता है। जिन मुख्य कारकों पर नज़र रखनी चाहिए, उनमें अमेरिकी फेडरल रिज़र्व का इंटरेस्ट रेट्स पर फॉरवर्ड गाइडेंस (forward guidance), US डॉलर इंडेक्स (US dollar index) की चाल, और मज़बूत अमेरिकी आर्थिक डेटा का जारी होना शामिल है, जो सेफ-हेवन डिमांड को कम कर सकते हैं। रिटेल निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे निवेश निर्णय लेने से पहले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के रुझानों, साथ ही व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य पर नज़र रखें।

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