सुरक्षित निवेश का 'गोल्डन' रन
4 फरवरी 2026 को सोने (Gold) की कीमतों ने ज़बरदस्त छलांग लगाई। ग्लोबल मार्केट में यह $5,000 प्रति औंस के अहम लेवल को पार कर $5,055 पर पहुंच गया, जो एक ही दिन में 2% की बढ़त है। भारतीय बाज़ारों में भी निवेशकों को यह तेज़ी सीधे तौर पर महसूस हुई, जहां 10 ग्राम सोने का दाम ₹1,57,620 दर्ज किया गया। यह पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले 3.8% या ₹5,762 की भारी बढ़ोतरी है। बाज़ार में आई हालिया गिरावट के बाद यह रिकवरी काफी मज़बूत मानी जा रही है, और इसने सोने में निवेशकों का भरोसा एक बार फिर बढ़ाया है। यह लगातार दूसरे सत्र में करीब 6% से ज़्यादा की तेज़ी दिखा रहा है।
ईटीएफ (ETFs) में भी तेज़ रफ़्तार
गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) ने भी बुलियन मार्केट के साथ ताल मिलाते हुए शानदार प्रदर्शन किया। हालिया गिरावट के बाद, 4 फरवरी को ज़्यादातर गोल्ड ईटीएफ पॉजिटिव क्लोज हुए, जिनमें 4% तक की बढ़त देखी गई। टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड इस तेज़ी में सबसे आगे रहा, जबकि निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईएस (Nippon India ETF Gold BeES) जैसे बड़े ईटीएफ में 3.67% का उछाल आया। निवेशकों की दिलचस्पी काफी तेज़ थी, जो टाटा फंड के हाई ट्रेडिंग वॉल्यूम और गोल्ड बीईएस के ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा के ट्रेड वैल्यू से ज़ाहिर होता है। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ईटीएफ के मार्केट प्राइस और नेट एसेट वैल्यू (NAV) में अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, 3 फरवरी को गोल्ड बीईएस का मार्केट प्राइस ₹129.80 ( 3.67% की बढ़त के साथ) था, जबकि इसका NAV ₹125.50 पर था।
जियोपॉलिटिकल हलचल और ब्रोकरेज की राय
सोने की कीमतों में इस तेज़ी का सबसे बड़ा कारण बढ़ा हुआ जियोपॉलिटिकल तनाव है। ईरान द्वारा एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर के पास ड्रोन गिराए जाने की ख़बरों ने सेफ-हेवन डिमांड को और हवा दी है, भले ही कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। इस वैश्विक अनिश्चितता के माहौल के बीच, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की मोनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को लेकर उम्मीदें भी बदल रही हैं। हालांकि, अभी तुरंत बड़े रेट कट्स की संभावना कम लग रही है, फिर भी बाज़ार 2026 में दो बार रेट कट की उम्मीद कर रहा है।
विश्लेषकों (Analysts) का नज़रिया सोने को लेकर लगातार बुलिश (bullish) होता जा रहा है। JP Morgan ने साल के अंत तक सोने का भाव $6,300 प्रति औंस तक जाने का अनुमान लगाया है, वहीं UBS ने 2026 के मध्य तक $6,200 का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तरों से 27% तक की संभावित बढ़त का संकेत देता है। इतिहास गवाह है कि जब भी मध्य पूर्व जैसे इलाकों में बड़ी जियोपॉलिटिकल टेंशन रही है, तब निवेशकों ने सुरक्षा के लिए सोने का रुख किया है, जिससे इसकी कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक द्वारा सोने की खरीद में लगातार वृद्धि और डी-डॉलरराइजेशन (de-dollarization) ट्रेंड भी कीमतों को स्ट्रक्चरल सपोर्ट दे रहे हैं।
रेगुलेटरी बदलाव और अन्य कमोडिटीज़ का हाल
भारत में कुछ रेगुलेटरी बदलावों ने भी सोने के बाज़ार को प्रभावित किया है। नए नियमों के तहत, लोग अब वज़न के आधार पर ₹6 लाख तक का सोना बिना ड्यूटी चुकाए ला सकते हैं, जिसका घरेलू मांग पैटर्न पर असर पड़ सकता है। जहाँ सोना रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं अन्य कीमती धातुओं (commodities) का प्रदर्शन भी देखने लायक है। सिल्वर (Silver) में सोने की तुलना में ज़्यादा मज़बूत उछाल नहीं दिखा है, और प्लैटिनम (Platinum) का भाव ज़्यादातर इंडस्ट्रियल डिमांड से जुड़ा रहता है। कुल मिलाकर, जियोपॉलिटिकल जोखिम, सेंट्रल बैंकों की नीतियां, बदलता निवेशक सेंटीमेंट और भारत जैसे प्रमुख बाज़ारों में सहायक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, ये सभी मिलकर सोने की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बनाए हुए हैं।
