Gold की कीमतों में रॉकेट सी तेजी! Tariff की चिंता बेअसर, टेक्निकल ब्रेकआउट ने दी उड़ान

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gold की कीमतों में रॉकेट सी तेजी! Tariff की चिंता बेअसर, टेक्निकल ब्रेकआउट ने दी उड़ान
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**24 फरवरी 2026** को Gold की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई। वैश्विक Tariff को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच, शुरुआती गिरावट के बावजूद सोने ने मजबूत टेक्निकल ब्रेकआउट के दम पर ऊपरी स्तरों को छुआ। सेफ-हेवन डिमांड और कमजोर डॉलर का भी सहारा मिला।

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टैरिफ की अनिश्चितता और सोने का दांव

24 फरवरी 2026 को Gold की कीमतों में एक मिश्रित लेकिन अंततः तेजी वाला रुझान देखा गया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ शक्तियों को सीमित करने वाले फैसले के तुरंत बाद, बाजार में एक नई अनिश्चितता छा गई। हालांकि, प्रशासन ने तुरंत 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत 10% का नया वैश्विक टैरिफ लागू करने का कदम उठाया, जिसे बाद में 15% तक बढ़ाने का संकेत दिया गया। इस बदलाव ने भविष्य की अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता को और बढ़ा दिया, जिससे 'Risk-off' सेंटिमेंट बढ़ा और Gold जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग को बढ़ावा मिला।

इस लगातार बनी अनिश्चितता के बावजूद, शुरुआत में 0.53% की मामूली गिरावट के बाद Gold की कीमतों ने मजबूत वापसी की। MCX पर Gold लगभग $5,197 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि सोमवार को Comex पर यह $5,136 के आसपास बंद हुआ था। विश्लेषकों का मानना ​​है कि अप्रत्याशित व्यापार नीतियां आर्थिक दृष्टिकोण को अस्थिर रखती हैं, जो Gold में निवेश को सपोर्ट करता है। भू-राजनीतिक तनाव, जैसे कि मध्य पूर्व में बढ़ती अशांति और अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में गतिरोध, भी Gold की अपील को बढ़ा रहे हैं। डॉलर इंडेक्स लगभग 97.8 पर बना रहा, जो अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का संकेत देता है, और यह आमतौर पर Gold की कीमतों के विपरीत चलता है।

टेक्निकल ब्रेकआउट का दम

मैक्रो अनिश्चितताओं से परे, 24 फरवरी 2026 को Gold की कीमतों में एक निर्णायक टेक्निकल ब्रेकआउट का भी बड़ा योगदान रहा। यह देखा गया कि MCX पर Gold ₹1,55,000 के स्तर के पास और CME पर $5,000 के आसपास एक छोटी अवधि का आधार बनाने के बाद, $5,130 के पिछले कंसॉलिडेशन सीलिंग को पार करने में सफल रहा। इस टेक्निकल उपलब्धि ने तेजी के मोमेंटम को फिर से जगाया। $5,300 (लगभग ₹1,63,000) के स्तर पर तुरंत अगला रेसिस्टेंस देखा गया, और $5,400 (लगभग ₹1,66,000) पर इसके ऊपर जाने के टारगेट थे। यह ब्रेकआउट बताता है कि यह केवल शॉर्ट-कवरिंग नहीं, बल्कि नई खरीदारी की दिलचस्पी है, जिससे आने वाले समय में Gold की कीमतों में और मजबूती की उम्मीद है। विश्लेषक ₹1.61 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छूने का अनुमान लगा रहे हैं।

आर्थिक कारक और मांग के प्रमुख चालक

कई मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर Gold की इस तेजी को और बल दे रहे हैं। केंद्रीय बैंकों द्वारा Gold की खरीद, हालांकि 2025 में 863.3 टन तक घटकर 21% की साल-दर-साल गिरावट देखी गई, फिर भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। डॉलर पर निर्भरता कम करने और भू-राजनीतिक हेजिंग की जरूरतों के कारण यह खरीद का रुझान मजबूत है। इसके अलावा, निवेशक की मांग, खासकर गोल्ड-ईटीएफ (Gold ETFs) के माध्यम से, जनवरी 2026 में रिकॉर्ड तोड़ रही। ग्लोबल ईटीएफ ने $19 बिलियन का इनफ्लो आकर्षित किया और कुल होल्डिंग्स 4,145 टन के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गईं। विविधीकरण और कीमत-संचालित अटकलों से प्रेरित यह निवेश गतिविधि, Gold की मजबूत मांग को दर्शाती है।

फेडरल रिजर्व (Fed) की स्वतंत्रता पर चिंताएं और विकसित देशों में लगातार बढ़ते सॉवरेन डेट (Sovereign Debt) का बोझ भी Gold को मुद्रा नीति की विश्वसनीयता और वित्तीय स्थिरता के खिलाफ एक बचाव (hedge) के रूप में आकर्षक बना रहा है। Real Interest Rates के साथ Gold का उल्टा संबंध है; जैसे-जैसे Real Yields कम होते हैं, Gold तुलनात्मक रूप से अधिक आकर्षक हो जाता है। हालांकि अमेरिका की Q4 GDP ग्रोथ 1.4% तक धीमी हो गई, कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) फर्म रहा, जिससे फेडरल रिजर्व के रेट कट की उम्मीदों पर मिला-जुला असर है। फिर भी, संभावित मॉनेटरी ईजिंग (Monetary Easing) और कमजोर होते अमेरिकी डॉलर का सामान्य रुझान Gold जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों के पक्ष में है।

जोखिम और आगे का रास्ता

इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, कुछ संभावित जोखिम भी मौजूद हैं। जनवरी 2026 के अंत में बाजार ने अत्यधिक प्राइस एक्शन देखा था, जिसमें Gold को 1980 के दशक के बाद अपनी सबसे बड़ी दैनिक प्रतिशत गिरावट का सामना करना पड़ा, जिसके बाद एक तेज रिकवरी हुई। यह अस्थिरता मौद्रिक नीति के संकेतों और सट्टेबाजी वाले कैपिटल फ्लो (speculative capital flows) के प्रति Gold की कीमतों की संवेदनशीलता को रेखांकित करती है, खासकर चीन से, जो बाजार में तेजी से सुधार ला सकते हैं।

हालांकि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी थोड़ी कम हुई है, Gold की ऊंची कीमतों की स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कुछ विश्लेषक दीर्घकालिक मांग चालकों पर सवाल उठा रहे हैं, यदि मुद्रास्फीति की उम्मीदें कम होती हैं या Real Interest Rates में काफी वृद्धि होती है। यदि फेड अप्रत्याशित रूप से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाता है, तो यह Gold की कीमतों पर दबाव डाल सकता है। इसके अतिरिक्त, Gold माइनिंग स्टॉक्स को रक्षात्मक संपत्ति माना जाता है, लेकिन 2026 में उत्पादन अनुमान, लागत दबाव और परियोजना समय-सीमा से संबंधित निष्पादन जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण

आगे देखते हुए, 2026 में Gold के लिए विश्लेषकों के अनुमान बड़े पैमाने पर आशावादी बने हुए हैं। J.P. Morgan Global Research का अनुमान है कि साल के अंत तक कीमतें $5,000/औंस तक पहुंच सकती हैं, जबकि $6,000/औंस को एक लंबी अवधि की संभावना माना जा रहा है। Goldman Sachs ने अपने साल के अंत के टारगेट को $5,400 तक बढ़ा दिया है, जबकि Wells Fargo $6,100 से $6,300 का अनुमान लगा रहा है। ये अनुमान लगातार मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं, केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी और भू-राजनीतिक तनावों को दर्शाते हैं। USAGOLD का अनुमान $4,400 से $6,300 तक है। अन्य अनुमान बताते हैं कि $4,700 और $6,500 के बीच कारोबार करने की संभावना के साथ, Gold रखने का मौलिक तर्क मजबूत बना हुआ है।

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