Gold Price Boom: 63% उछाल के साथ ₹1.55 लाख के पार! अब ज्वेलरी से ज्यादा ETFs की डिमांड

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold Price Boom: 63% उछाल के साथ ₹1.55 लाख के पार! अब ज्वेलरी से ज्यादा ETFs की डिमांड
Overview

सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल देखा गया है। पिछले साल के मुकाबले **63%** की जबरदस्त तेजी के साथ 24-कैरेट सोने का भाव **₹1.55 लाख** प्रति 10 ग्राम को पार कर गया है। भू-राजनीतिक चिंताओं और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी के चलते यह बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) जैसे शुभ अवसर से पहले, भारतीय निवेशक फिजिकल ज्वेलरी की जगह अब गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं।

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सोने की कीमतों में 'तूफानी' तेजी के पीछे क्या है?

पिछले साल 15 अप्रैल को जहां 24-कैरेट सोने का भाव ₹95,500 प्रति 10 ग्राम के आसपास था, वहीं 15 अप्रैल 2026 को यह बढ़कर लगभग ₹1,55,570 तक पहुंच गया है। यह 63% का भारी उछाल है, जो भारत के सबसे शुभ त्योहारों में से एक, अक्षय तृतीया से ठीक पहले आया है।

मौजूदा बाजार की बात करें तो ब्रेंट क्रूड ऑयल $94.25 प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है और USD/INR एक्सचेंज रेट 93.20 के स्तर पर है। यह सब भू-राजनीतिक तनाव और बदलती आर्थिक स्थिति का असर दिखा रहा है। सोने की यह मजबूती ग्लोबल सेंट्रल बैंकों की तरफ से लगातार हो रही खरीदारी और खुदरा निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से भी सपोर्ट पा रही है, जो इसे एक 'सेफ एसेट' (Safe Asset) के तौर पर स्थापित कर रहा है, भले ही कीमतें कितनी भी ऊंची क्यों न हों। पिछले हफ्ते ही सोने के भाव में 2% की तेजी देखी गई। वहीं, चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट आई, जो ₹2,52,680 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

निवेशकों का बदला रुझान: Gold ETFs की बढ़ी डिमांड

इस साल अक्षय तृतीया पर सोने की डिमांड का मिजाज साफ बदलता दिख रहा है। पारंपरिक फिजिकल ज्वेलरी की जगह अब निवेशक डिजिटल गोल्ड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। भारतीय गोल्ड ईटीएफ में जनवरी 2026 में ₹24,040 करोड़ का शानदार इनफ्लो (Inflow) देखने को मिला, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। यह दिखाता है कि निवेशक किस तरह से अपने धन को सुरक्षित रखने और डायवर्सिफाई करने के तरीके खोज रहे हैं।

यह ट्रेंड ग्लोबल रुझानों से थोड़ा अलग है, जहां मार्च 2026 में उत्तरी अमेरिका से $12 बिलियन का रिकॉर्ड आउटफ्लो (Outflow) हुआ था। इसके पीछे ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीदें और 'रिस्क-ऑफ' सेंटीमेंट को वजह माना जा रहा है। हालांकि, भारत और चीन जैसे एशियाई निवेशकों से लगातार आ रहे इनफ्लो ने पश्चिमी देशों के इन निवेशों को कुछ हद तक बैलेंस किया है।

सेंट्रल बैंक अभी भी सोने के बड़े खरीदार बने हुए हैं, जिन्होंने 2025 में करीब 860 टन सोना खरीदा था और 2026 में भी यह खरीदारी 800 टन के आसपास रहने का अनुमान है। इस लगातार संस्थागत मांग के चलते सोना अब ग्लोबल ऑफिशियल रिजर्व्स का एक बड़ा हिस्सा बन गया है, जो अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स से भी ज्यादा है।

क्या कीमतों पर लग सकता है ब्रेक?

हालांकि सोने की सांस्कृतिक अहमियत है, लेकिन मौजूदा कीमत में इतनी तेजी कुछ जोखिम भी लेकर आई है। लगातार ऊंची कीमतें मांग को कम कर सकती हैं, खासकर उन खरीदारों के लिए जो कीमत के प्रति संवेदनशील होते हैं और पारंपरिक तौर पर फिजिकल ज्वेलरी खरीदते हैं। लोग भले ही हल्की ज्वेलरी या सिक्के खरीद रहे हों, लेकिन पिछले 12 महीनों में 63% की भारी बढ़ोतरी खरीदारों को हतोत्साहित कर सकती है।

भारतीय रुपये में आई 9.13% की बड़ी गिरावट (जो मार्च 2026 में 99.82 के ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा) सोने के आयात की लागत को बढ़ा रही है, जिससे घरेलू कीमतें और भी ऊपर जा रही हैं। भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने को सपोर्ट करते हैं, लेकिन अगर शांति वार्ता जैसी सकारात्मक खबरें आती हैं, तो जोखिम की धारणा कम होने से कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, उत्तरी अमेरिकी गोल्ड ईटीएफ से मार्च में हुआ बड़ा आउटफ्लो भी संकेत देता है कि संस्थागत निवेशक अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं।

आगे क्या उम्मीद करें?

विश्लेषकों का मानना है कि सोने की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी। अनुमान है कि अगले अक्षय तृतीया तक सोने का भाव ₹2 लाख के आंकड़े को छू सकता है। इसके पीछे सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी और ईटीएफ की मजबूत डिमांड बनी रहेगी। डिजिटल गोल्ड एसेट्स की ओर रुझान जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि निवेशक फिजिकल सोने से जुड़े मेकिंग चार्जेज (Making Charges) और स्टोरेज की झंझटों से बचना चाहते हैं। सोना, सांस्कृतिक प्रतीक और भू-राजनीतिक व करेंसी जोखिमों के खिलाफ एक हेज (Hedge) के तौर पर अपनी दोहरी भूमिका के कारण निवेशकों की रुचि बनाए रखने की अच्छी स्थिति में है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.