वैल्यूएशन का खेल
सोने की कीमतों में हालिया नरमी, सुरक्षित निवेश की तलाश और मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों के बीच एक खींचतान को दर्शाती है। स्पॉट गोल्ड, जो हाल ही में $4,500 प्रति औंस के स्तर के करीब था, 3 जून 2026 के शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ा, क्योंकि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99.2 के करीब पहुंच गया। डॉलर की इस मजबूती ने सोने की अपील को कम कर दिया, खासकर जब निवेशकों ने फेडरल रिजर्व की भविष्य की मौद्रिक नीति के बारे में अपनी उम्मीदों को फिर से परखा।
विश्लेषणात्मक विश्लेषण: लेबर मार्केट का असर
इस नवीनतम बदलाव का मुख्य कारण इस सप्ताह जारी हुए मजबूत श्रम आंकड़े थे, जिनसे पता चला कि अप्रैल में अमेरिकी नौकरियों के अवसर 7.62 मिलियन तक बढ़ गए, जो पिछले दो सालों में सबसे अधिक हैं। श्रम बाजार की यह मजबूती, छंटनी में उल्लेखनीय गिरावट के साथ मिलकर, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को ठंडा कर रही है। क्लीवलैंड फेड प्रेसिडेंट बेथ हैमैक की टिप्पणी, जिसमें उन्होंने कहा कि लगातार महंगाई के कारण ऊंची दरें बनाए रखने की आवश्यकता हो सकती है, ने सोने पर दबाव डाला।
मंदी का फोरेंसिक विश्लेषण
भू-राजनीतिक अस्थिरता के अलावा, कुछ संरचनात्मक कमजोरियां भी सोने को प्रभावित कर रही हैं। भारत में मांग विशेष रूप से प्रभावित हुई है, क्योंकि सरकार ने मई में सोने के आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इस 18.45% के प्रभावी कर बोझ के कारण, भारत में भौतिक मांग पिछले साल की तुलना में लगभग 70% तक गिर गई है। इसके अलावा, भारतीय और दुबई के सोने के बीच वर्तमान मूल्य अंतर 11% से अधिक बना हुआ है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस प्रीमियम को झेलना मुश्किल हो रहा है। यह एक बड़ा जोखिम है कि यदि डॉलर मजबूत होता रहा और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मौजूदा स्तरों पर बनी रहीं, तो सोने का बाजार $4,400 प्रति औंस के समर्थन स्तर को तोड़ सकता है।
भविष्य का दृष्टिकोण
बाजार प्रतिभागी अब नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट और जून के मध्य में होने वाली FOMC मीटिंग पर नजरें टिकाए हुए हैं। जबकि दीर्घकालिक फंडामेंटल - केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी - सोने के बाजार के लिए एक आधार बने हुए हैं, अल्पकालिक प्रदर्शन संभवतः मुद्रा की मजबूती और महंगाई के आंकड़ों के बीच के तालमेल से तय होगा। विश्लेषकों में मतभेद है, लेकिन मौजूदा राय आर्थिक मंदी के स्पष्ट संकेत मिलने तक लगातार अस्थिरता की ओर इशारा कर रही है।
