बाजार की यह चाल थोड़ी हैरानी वाली है। आमतौर पर, जब मध्य पूर्व जैसे इलाकों में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो सोने (Gold) जैसी सुरक्षित संपत्तियों (safe-haven assets) की मांग बढ़ जाती है और कीमतें आसमान छूने लगती हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। Gold की कीमतों में मजबूती के बजाय, एक तरह की स्थिरता या हल्की गिरावट देखी जा रही है। इसके पीछे के मुख्य कारण हैं - अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) की बढ़ती ताकत और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की मौद्रिक नीति (monetary policy) के संकेत।
डॉलर का बढ़ता दबदबा
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) पिछले महीने में करीब 2.12% मजबूत हुआ है। IMF की एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर अभी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्रणाली का 'केंद्र' बना हुआ है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर में मूल्यवान सोना (dollar-denominated bullion) अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद Gold को वह बढ़त नहीं मिल पा रही है जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
फेड पॉलिसी और महंगाई की चिंता
दूसरी ओर, फेडरल रिजर्व की नीतियां भी Gold की राह में रोड़ा बन रही हैं। हाल में तेल की कीमतों में 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी ने महंगाई (inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस महंगाई को काबू में रखने के लिए, फेडरल रिजर्व ब्याज दरों (interest rates) में कटौती की बजाय उन्हें 'लंबे समय तक ऊँचा' (higher for longer) रखने का संकेत दे रहा है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो Gold जैसी संपत्ति, जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता, उसे रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है, जिससे इसकी कीमतों पर दबाव आता है।
सेंट्रल बैंकों की खरीद में नरमी, पर मांग बरकरार
हाल के वर्षों में सेंट्रल बैंक Gold के बड़े खरीदार रहे हैं, लेकिन उनकी खरीद की गति धीमी हुई है। World Gold Council (WGC) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में सेंट्रल बैंकों ने केवल 5 टन Gold खरीदा, जबकि 2025 में यह औसत 27 टन प्रति माह था। हालांकि, WGC का अनुमान है कि 2026 में भी सेंट्रल बैंकों की मांग मजबूत बनी रहेगी, क्योंकि वे अनिश्चितता के बीच Gold को एक रणनीतिक संपत्ति मानते हैं।
भू-राजनीति से आगे: बाजार के बड़े बदलाव
विश्लेषक मानते हैं कि Gold की कीमतों में जो भी हलचल हो रही है, वह अब छोटी-मोटी भू-राजनीतिक खबरों के बजाय बड़े संरचनात्मक बाजार बदलावों (structural market shifts) से तय हो रही है। बाजार के आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि Gold में घबराहट वाली खरीदारी (panic buying) के बजाय एक तरह का ठहराव (consolidation) है, जो कि पहले के मुकाबले अलग है।
आगे का रास्ता
कुल मिलाकर, Gold का भविष्य थोड़ा जटिल लग रहा है। कुछ विश्लेषक आगे भी कीमतों में इसी तरह का ठहराव देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि मांग और अनिश्चितताओं के चलते यह नई ऊंचाइयों को भी छू सकता है। Gold की आगे की चाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितताओं के आपसी तालमेल पर निर्भर करेगी।