अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद सोने (Gold) की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। पीली धातु फिलहाल ₹143,500 के स्तर के आसपास मजबूत हो रही है। अब निवेशकों की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली पॉलिसी पर हैं, साथ ही अमेरिका से आने वाले लेबर डेटा भी सोने की चाल तय करेंगे।
भू-राजनीतिक तनाव कम होने से मिली राहत
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी आने से वैश्विक बाजारों को कुछ राहत मिली है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में भी देखा गया है। कमोडिटी (Commodity) की कीमतों में नरमी आने से महंगाई (Inflation) को लेकर चिंताएं भी कम हुई हैं, जिसका सीधा असर केंद्रीय बैंकों की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिका की ओर से टैरिफ (Tariff) को लेकर की गई हालिया घोषणाओं के चलते वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
भारतीय निवेशकों के लिए अहम संकेत
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों का रुझान भारतीय सर्राफा बाजार के लिए काफी मायने रखता है। भारतीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा इवेंट अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की पॉलिसी मीटिंग होगी। फेड चेयर की ओर से ब्याज दरों (Interest Rates) और महंगाई को लेकर दिए जाने वाले संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे। इसके अलावा, अमेरिका से आने वाले लेबर मार्केट के आंकड़े और महंगाई रिपोर्ट भी यह स्पष्ट करेंगे कि सोने की मौजूदा रेंज-बाउंड चाल जारी रहेगी या इसमें कोई बड़ी हलचल देखने को मिलेगी।
टेक्निकल चार्ट्स क्या कहते हैं?
तकनीकी तौर पर, सोना फिलहाल एक बेस बनाने की कोशिश कर रहा है। ₹143,500 का स्तर इमीडिएट सपोर्ट (Immediate Support) का काम कर रहा है। अगर कीमतें और गिरती हैं, तो ₹139,500 और ₹138,000 के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है। वहीं, ₹147,600 से ₹147,700 का स्तर रेजिस्टेंस (Resistance) का काम कर रहा है। इस रेजिस्टेंस जोन से ऊपर निकलने पर सोने में ₹152,000 और ₹159,700 तक के स्तर देखे जा सकते हैं। हालांकि, यह सब मैक्रो इकोनॉमिक डेवलपमेंट (Macroeconomic Developments) जैसे ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yields) और करेंसी (Currency) में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगा। आने वाले हफ्तों में सोने की चाल जानने के लिए फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग और उसके बाद के कमेंट्री पर पैनी नजर रखनी होगी।
