जुलाई के उतार-चढ़ाव भरे महीने के बाद सोने की कीमतों में $4,000 प्रति औंस के करीब मजबूती दिखी है। डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों का दबाव बना हुआ है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी और एशियाई देशों की लगातार मांग से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अब निवेशकों की नजर अमेरिकी लेबर मार्केट के आंकड़ों पर है, जो फेडरल रिजर्व के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
जुलाई की अस्थिरता के बाद स्थिरता
सोना, जो जुलाई में काफी अस्थिर था, अब $4,000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर स्थिर हो गया है। यह जुलाई की शुरुआत में देखी गई तेज गिरावट से एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि बाजार नई दिशा की तलाश कर रहा है।
जुलाई में कीमतों में उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता थी। जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद होती है, तो सोने पर दबाव पड़ता है, क्योंकि यह बॉन्ड की तरह ब्याज नहीं देता। मजबूत अमेरिकी डॉलर ने भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना महंगा बना दिया, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा। इन चुनौतियों के बावजूद, धातु ने जुलाई को मासिक बढ़त के साथ समाप्त किया, जो फरवरी के बाद पहली ऐसी बढ़त थी।
मजबूती के कारण और मांग
सोने की स्थिरता का एक बड़ा कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंक पूरे साल रिकॉर्ड मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, जो कीमतों को सहारा दे रहा है। इसके अलावा, एशिया में संस्थागत निवेशकों ने कीमतों में गिरावट के दौरान सक्रिय रूप से खरीदारी की है, जिससे पश्चिमी बाजारों में बिकवाली के दबाव से राहत मिली है।
भारत में निवेशकों के लिए, कीमतों का अनुभव थोड़ा अलग रहा है। आयात शुल्क में बदलाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल जैसे स्थानीय कारकों ने घरेलू सोने की कीमतों को सहारा दिया है। इसके कारण वैश्विक बाजारों में देखी गई तेज गिरावट की तुलना में घरेलू कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
जोखिम और बाजार का अनुमान
हालांकि लंबी अवधि में संस्थागत मांग से मजबूती बने रहने की उम्मीद है, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि यदि ब्याज दरें उम्मीद से अधिक समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो बाजार में अधिक स्थिरता आने से पहले कीमतों में 6% से 8% की गिरावट देखी जा सकती है। सोना वर्तमान में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के प्रति बहुत संवेदनशील है, जिसका अर्थ है कि मजबूत लेबर मार्केट के कोई भी संकेत आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें जगा सकते हैं, जो कीमतों पर दबाव डाल सकता है।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
बाजार अब फेडरल रिजर्व के अगले कदमों को लेकर स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। इस सप्ताह देखने वाले सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े अमेरिकी लेबर मार्केट की रिपोर्टें होंगी, जिनमें जॉब ओपनिंग्स एंड लेबर टर्नओवर सर्वे (JOLTS) और नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट शामिल हैं। ये आंकड़े सितंबर की नीतिगत बैठक के लिए बाजार की उम्मीदों को प्रभावित करेंगे। तकनीकी रूप से, विश्लेषक $4,000 प्रति औंस को एक प्रमुख सपोर्ट स्तर मानते हैं; इस स्तर से ऊपर बने रहना स्थिरता का संकेत दे सकता है, जबकि इस स्तर के नीचे जाने पर कीमतों में और गिरावट आ सकती है।
