ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई उछाल का असर सोने की चमक पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना **2.1%** गिरकर **$4,198** प्रति औंस पर आ गया है, जिससे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं।
तेल की बढ़ती कीमतें और सोने का गणित
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) के दाम $106.50 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। सोने के लिए यह स्थिति मुश्किल खड़ी कर रही है, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को हवा देती हैं। महंगाई बढ़ने पर US Federal Reserve ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है, जिससे सोने जैसे नॉन-यिल्डिंग एसेट से निवेशकों का मोहभंग होता है।
भारतीय बाजारों पर असर
इस ग्लोबल सेंटीमेंट ने दलाल स्ट्रीट पर भी दबाव बनाया है। सोमवार को BSE Sensex 659.65 अंक फिसलकर 73,236.09 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 में 217.50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,923 पर आ गया। बाजार के 16 में से 14 प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए, जो निवेशकों में बढ़ते डर को दर्शाता है।
भारत के लिए चुनौतियां
भारत दुनिया का एक बड़ा तेल आयातक है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ाती हैं और रुपये को कमजोर करती हैं। रुपया गिरने से 'इंपोर्टेड महंगाई' बढ़ती है, जिसका सीधा असर कंज्यूमर की जेब और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ता है। अब बाजार की नजरें अमेरिका के आगामी लेबर डेटा और इन्फ्लेशन के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो फेडरल रिजर्व के अगले कदम का रास्ता तय करेंगे।
