भारतीय सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में इस हफ्ते उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाज़ार की नज़रें इस वक़्त अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हैं। बीते हफ्ते इन कीमती धातुओं में गिरावट आई थी।
क्या हुआ?
भारतीय कमोडिटी मार्केट में सोना और चांदी की कीमतें इस हफ्ते बड़ी उठापटक के लिए तैयार हैं। पिछले हफ्ते दोनों कीमती धातुओं में अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गई थी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स 2.2% गिरकर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं, चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली, जो 5.3% लुढ़क कर ₹2.33 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भू-राजनीतिक बातचीत और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे वैश्विक कारक हावी हैं।
बाज़ार क्यों देख रहा है तेल और भू-राजनीति पर?
बाजार के प्रतिभागी इस वक़्त संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। इस बातचीत का मकसद तनाव कम करने के लिए एक ढांचागत समझौते पर पहुंचना है, जो कमोडिटी की कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। चूंकि ये दोनों देश एनर्जी मार्केट के अहम खिलाड़ी हैं, इसलिए किसी भी तरह का घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, जो बदले में महंगाई और सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों पर असर डालता है।
हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य, जो तेल के लिए एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है, को लेकर भी खबरें आ रही थीं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि क्षेत्रीय हमलों के बाद इस जलडमरूमध्य को बंद किया जा सकता है। लेकिन, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन दावों का खंडन किया है और कहा है कि शिपिंग संचालन बिना किसी रुकावट के जारी है। निवेशक इन अपडेट्स पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि तेल आपूर्ति मार्गों में स्थिरता अक्सर ऊर्जा लागत और बाज़ार की भावनाओं को प्रभावित करती है।
करेंसी और ब्याज दरों का असर
भारतीय निवेशकों के लिए, भारतीय रुपये की मजबूती घरेलू सोने की कीमतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है, तो भारत में सोना आयात करने की लागत कम हो जाती है। इससे अक्सर स्थानीय कीमतों पर दबाव पड़ता है। हाल ही में, रुपये के प्रदर्शन और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख (hawkish stance) ने सोने पर दबाव डाला है।
फेडरल रिजर्व का सख्त रुख आम तौर पर बताता है कि केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को ऊंचा रखने या संभावित रूप से बढ़ाने पर केंद्रित है। इससे अक्सर अमेरिकी डॉलर निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाता है, जो सोने पर दबाव डाल सकता है, क्योंकि सोना एक ऐसा एसेट है जिस पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है।
आने वाला अहम आर्थिक डेटा
भू-राजनीतिक घटनाओं के अलावा, कई वैश्विक आर्थिक डेटा जारी होने वाले हैं, जो कीमतों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के नीतिगत फैसलों पर नजर रखेंगे, क्योंकि चीन सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। इसके अलावा, अमेरिकी विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन, आवास के आंकड़े और पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) महंगाई - जो फेडरल रिजर्व के लिए एक महत्वपूर्ण पैमाना है - पर आने वाली रिपोर्टें भविष्य की ब्याज दर नीति का अनुमान लगाने के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
भारतीय कमोडिटी मार्केट अगले शुक्रवार, 26 जून, 2026 को मुहर्रम के कारण सुबह के सत्र में बंद रहेगा। निवेशक इस बात पर ध्यान दे सकते हैं कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कैसा प्रदर्शन करता है, क्योंकि यह सीधे आयातित कीमती धातुओं की लागत को प्रभावित करता है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा ब्याज दरों के बारे में कोई भी नई टिप्पणी, अमेरिकी-ईरान ढांचागत वार्ता में प्रगति के साथ, ऐसे प्रमुख कारक होंगे जो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा तय कर सकते हैं।
