सीजफायर की उम्मीदों से बुलियन में आई तेज़ी, पर शांति पर मंडराए बादल
8 अप्रैल 2026 को कीमती धातुओं (Precious Metals) में अचानक तेज़ी देखी गई। वजह बनी अमेरिका और ईरान के बीच एक सशर्त दो-सप्ताह के सीजफायर की खबरें। घरेलू बाजार में सोना ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के पार जाने की कगार पर था, वहीं चांदी ₹2.60 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। इस उछाल ने ग्लोबल मार्केट में भी राहत के संकेत दिए, क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट आई और शेयर बाजारों में तेज़ी दिखी, जिससे संघर्ष बढ़ने का तात्कालिक डर कम हुआ।
सीजफायर की उम्मीदों ने खींचा दामों को ऊपर
इस खबर का सीधा असर वायदा बाजार (Futures Market) पर पड़ा। MCX पर सोने का फ्यूचर ₹1,53,944 प्रति 10 ग्राम तक चढ़ गया, और इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड $4,821.48 प्रति औंस पर पहुंचा। चांदी के फ्यूचर में भी 6% की तेज़ी आई और यह ₹2,44,770 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इस तेज़ी को अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से भी सहारा मिला, जो डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज के लिए अक्सर अच्छा होता है। बाजार की उम्मीदें तेल की कीमतों में स्थिरता से इन्फ्लेशन (Inflation) कम होने पर टिकी थीं, जो सीजफायर की खबर से $100 प्रति बैरल से नीचे गिर गए थे। बिटकॉइन में भी अच्छी खासी तेज़ी देखी गई, यह $73,000 के स्तर को छू गया, जो ग्लोबल मार्केट में जोखिम भरी संपत्तियों (Riskier Assets) की ओर झुकाव का संकेत देता है।
भू-राजनीतिक उम्मीदें टकराईं आर्थिक हकीकतों से
तात्कालिक राहत के बावजूद, मार्केट एनालिस्ट्स इस बात को लेकर सतर्क हैं कि यह सीजफायर सशर्त और बेहद नाजुक है। एक बड़ा फैक्टर यह है कि हॉरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की संभावना, जो ग्लोबल तेल सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। Augmont Bullion ने सोने के लिए ₹1.59 लाख और चांदी के लिए ₹2.65 लाख का टारगेट प्राइस बताया है। लेकिन, यह सब स्थायी तनाव में कमी पर निर्भर करता है, जो इतिहास को देखते हुए अक्सर अनिश्चित होता है। इसके अलावा, जहां भू-राजनीतिक जोखिमों ने सोने को पारंपरिक तौर पर एक सेफ-हेवन एसेट (Safe-haven Asset) के रूप में सहारा दिया है, वहीं मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां इस स्थिति को जटिल बना रही हैं। ऊंची ब्याज दरें (Interest Rates) और महंगाई की चिंताओं के कारण ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना, सोने जैसी संपत्तियों के लिए एक बड़ी बाधा पैदा करती है, जो कोई ब्याज नहीं देतीं। यह फाइनेंशियल ईयर 2026 की स्थिति से अलग है, जब नीतिगत अनिश्चितता और सेंट्रल बैंक की खरीदारी के कारण सोना-चांदी में काफी गेन हुआ था।
क्यों यह तेज़ी टिक नहीं सकती?
यह सीजफायर तात्कालिक जोखिमों के प्रति बाजार की प्रतिक्रिया है, न कि भू-राजनीतिक या आर्थिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव। बातचीत में किसी भी तरह की गड़बड़ या हॉरमूज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में विफलता, जल्द ही अस्थिरता वापस ला सकती है और कीमती धातुओं पर दबाव डाल सकती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि हालिया संघर्ष के दौरान सोने की पारंपरिक सेफ-हेवन अपील का परीक्षण हुआ, क्योंकि लिक्विड एसेट्स की मांग ने डॉलर को मजबूत किया, जिससे सोने पर दबाव पड़ा। बाजार अब आर्थिक फंडामेंटल्स पर वापस लौट रहा है, जहां फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) का मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के प्रति रवैया और महंगाई के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। इस साल के बाकी हिस्सों के लिए फेड द्वारा उधार लागत को स्थिर रखने की संभावना, सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के लिए एक बड़ा ड्रैग (Drag) पैदा करती है। इस तेज़ी को संघर्ष के तत्काल डर के कम होने के कारण एक 'क्षतिपूर्ति रिकवरी' (Compensatory Recovery) के तौर पर देखा जा रहा है, न कि फंडामेंटल डिमांड पर आधारित स्थायी चाल के रूप में।
आगे का अनुमान: अनिश्चितता के बीच सतर्क उम्मीद
फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए, सोना और चांदी का आउटलुक मध्यम रूप से सकारात्मक बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितताएं, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार युद्ध की चिंताएं, जो आमतौर पर सेफ-हेवन की मांग को बढ़ाती हैं, इसका समर्थन करेंगी। हालांकि, ऊंची ब्याज दरें कीमतों में तेज वृद्धि को सीमित कर सकती हैं। सेंट्रल बैंकों से मांग और डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization) की ओर कदम, सोने को दीर्घकालिक समर्थन प्रदान करने की उम्मीद है। निवेशकों को महंगाई के आंकड़ों और मौद्रिक नीति के संकेतों पर बारीकी से नजर रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि संघर्ष में यह वर्तमान ठहराव स्थायी नहीं है।