पॉलिसी से बढ़ी बाजार में हलचल!
सोमवार को Gold और Silver की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण वैश्विक व्यापारिक मोर्चों पर बढ़ता तनाव रहा। यूएस सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद शुरू हुए इस घटनाक्रम को पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ ने और हवा दी। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रम्प ने वीकेंड पर वैश्विक टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने की घोषणा की, जिससे बाजार में और भी ज्यादा अस्थिरता देखने को मिली।
इस पॉलिसी-चालित उथल-पुथल के चलते निवेशकों ने Gold जैसी कीमती धातुओं को 'सेफ हेवन' के तौर पर देखा। इसी का नतीजा है कि Gold फ्यूचर्स (Futures) $5,171.20 के आसपास कारोबार कर रहे थे, वहीं Silver फ्यूचर्स $86.575 के करीब पहुंच गए। SPDR Gold Shares ETF (GLD) $468.62 पर और iShares Silver Trust ETF (SLV) $76.62 पर ट्रेड होते दिखे। यह दिखाता है कि बाजार केवल आर्थिक आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक (Geopolitical) खबरों और नीतिगत घोषणाओं पर भी तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है।
एनालिस्ट्स की नजर: डायवर्सिफिकेशन और डॉलर की चाल
कीमतों में इस तेजी के पीछे कई और फैक्टर्स भी काम कर रहे हैं। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (Central Banks) लगातार Gold खरीद रहे हैं और अपने रिजर्व बढ़ा रहे हैं। ऐसा डॉलर-आधारित संपत्तियों से दूरी बनाने और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए किया जा रहा है। अनुमान है कि 2026 तक सेंट्रल बैंकों की Gold खरीदारी 755 टन तक पहुंच सकती है, जो कीमतों के लिए एक सपोर्ट का काम करेगी। सर्वे बताते हैं कि 95% सेंट्रल बैंक 2026 में अपने Gold रिजर्व बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी इंटरेस्ट रेट (Interest Rates) में नरमी की उम्मीदें भी Gold के लिए सकारात्मक संकेत हैं। ऐतिहासिक रूप से, कम ब्याज दरें Gold जैसी नॉन-यील्डिंग संपत्तियों को बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली इंस्ट्रूमेंट्स की तुलना में अधिक आकर्षक बनाती हैं। यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) में नरमी देखी जा रही है, जो आमतौर पर कीमती धातुओं की कीमतों के लिए अच्छा संकेत होता है। वहीं, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) लगभग 4.075% पर बनी हुई हैं।
ऐतिहासिक रूप से, व्यापार विवादों के दौरान Gold ने ट्रेजरी और येन जैसे अन्य सेफ-हेवन एसेट्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। Silver की औद्योगिक मांग थोड़ी अलग है, लेकिन इसकी कीमतों में भी उछाल आया है। 29 जनवरी, 2026 को तो Silver ने अपने ऑल-टाइम नॉमिनल हाई $121.67 को छुआ था, जबकि Gold 5,595 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया था।
चुनौतियाँ: मंदी का डर और नीतिगत उलटफेर
हालांकि, Gold और Silver में मौजूदा तेजी के बावजूद कुछ बड़ी चुनौतियां भी मंडरा रही हैं। ट्रेड वॉर के बढ़ने से वैश्विक आर्थिक मंदी (Global Economic Slowdown) का खतरा बढ़ रहा है। IMF का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ घटकर 3.1% रह सकती है, जबकि वर्ल्ड बैंक 2025 के लिए यह 2.3% रहने का अनुमान लगा रहा है। ऐसी मंदी Silver जैसी औद्योगिक धातुओं की मांग को प्रभावित कर सकती है, भले ही Gold अपनी सेफ-हेवन अपील बनाए रखे।
बाजार की यह दिशा नीतिगत फैसलों पर बहुत अधिक निर्भर है, जो इसमें अस्थिरता ला सकती है। व्यापार नीति में अचानक कोई बड़ा बदलाव, अप्रत्याशित जवाबी कार्रवाई या सेंट्रल बैंकों द्वारा मौद्रिक नीति को तेजी से कसने जैसे कदम बाजार की भावना को जल्दी बदल सकते हैं। टैरिफ का वैश्विक सप्लाई चेन और महंगाई पर दीर्घकालिक प्रभाव अभी भी बहस का विषय है।
आगे का रास्ता: लगातार मांग, अनिश्चित ग्रोथ
भविष्य की बात करें तो, सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं Gold और Silver की मांग को समर्थन देना जारी रखेंगी। विश्लेषकों को उम्मीद है कि 2026 तक सेंट्रल बैंकों की Gold खरीदारी कीमतों को सपोर्ट करती रहेगी।
हालांकि, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और व्यापार की बदलती गतिशीलता इस पर बड़ा असर डालेगी। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें तब तक बनी रहेंगी जब तक महंगाई नियंत्रण में है। बाजार व्यापार वार्ताओं, टैरिफ समायोजनों और भू-राजनीतिक विकास से जुड़ी खबरों के प्रति संवेदनशील बने रहेंगे। Gold का मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ बचाव (Hedge) के रूप में आकर्षण मजबूत बना हुआ है, लेकिन Silver की कीमत निवेश प्रवाह और वैश्विक आर्थिक गतिविधि दोनों से प्रभावित होगी। अनुमान है कि 2026 में Gold की कीमतें $4,700 से $6,500 के बीच उतार-चढ़ाव कर सकती हैं।