बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में यह तेज़ी अब एक ऐसे बाज़ार को दिखा रही है जो पारंपरिक इकोनॉमिक डेटा (Economic Data) से ज़्यादा पॉलिसी (Policy) को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित हो रहा है। सोमवार, 23 फरवरी, 2026 को, Gold की कीमतें $5,143 प्रति औंस तक पहुंच गईं, जो 0.8% की तेज़ी दर्शाती है, और Silver 2% उछलकर $86.24 पर पहुंच गई। यह बढ़त महज़ ख़बरों पर प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह गहरे निवेशक के रीकैलिब्रेशन (Recalibration) का संकेत है, जो दुनिया भर की अस्थिरता के खिलाफ एक हेज़ (Hedge) की ओर बढ़ रहा है।
पॉलिसी की गड़बड़ और भू-राजनीतिक तनाव बने मुख्य कारण
कीमती धातुओं में इस तेज़ी का मुख्य कारण अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी को लेकर बनी हुई गफलत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, सरकार की ओर से नए टैरिफ (Tariff) दरों का ऐलान हुआ, जिससे मार्केट में काफी अनिश्चितता फ़ैल गई। इस माहौल में निवेशक सोने को एक 'हेज़' (Hedge) के तौर पर देख रहे हैं। अमेरिका के डॉलर (Dollar) के गिरते दामों ने भी इन कीमती धातुओं को और ज़्यादा आकर्षक बना दिया, क्योंकि डॉलर में खरीदी जाने वाली चीजें विदेशी खरीदारों के लिए सस्ती हो जाती हैं। मध्य-पूर्व और रूस-यूक्रेन जैसे इलाकों में बढ़ता तनाव भी लोगों को सोने-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर धकेल रहा है। खासकर Silver की मांग में तेज़ी के पीछे इन सब वजहों के अलावा, 'लूनर न्यू ईयर' (Lunar New Year) के बाद बढ़ी इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand) का भी बड़ा हाथ है।
मॉनेटरी पॉलिसी का दांव-पेंच और डॉलर का खेल
एक ओर अमेरिका की इकोनॉमी (Economy) के मिले-जुले संकेत, जैसे कि दिसंबर की तिमाही में ग्रोथ का अनुमान से कम रहना, लेकिन कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) का उम्मीद से ज़्यादा बढ़ना, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है। बाज़ार की कैलकुलेशन बता रही है कि जून में ब्याज दरों में कटौती की संभावना घटी है, जो पहले 60% से ज़्यादा थी, अब घटकर करीब 52% रह गई है। आम तौर पर, ब्याज दरों का कम होना सोने जैसी नॉन-यील्डिंग (Non-yielding) संपत्तियों के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि ऐसी संपत्तियों को रखने की 'मौका लागत' (Opportunity Cost) कम हो जाती है। लेकिन, इसके उलट, बढ़ी हुई दरें सोने के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) और सोने की कीमतों के बीच का उल्टा रिश्ता भी सबको पता है; जब डॉलर गिरता है, तो सोना अक्सर चढ़ता है। मौजूदा डॉलर की कमजोरी भी पॉलिसी की अनिश्चितता की ओर इशारा करती है।
स्ट्रक्चरल डिमांड और बदलता उपभोक्ता व्यवहार
बाज़ार की मौजूदा उठापटक से परे, स्ट्रक्चरल डिमांड (Structural Demand) भी सोने-चांदी को सहारा दे रही है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (Central Banks) अब सोने की खरीद को सिर्फ कभी-कभार होने वाली खरीदारी से बदलकर एक लगातार चलने वाली डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) रणनीति का हिस्सा बना रहे हैं। ज़्यादातर सेंट्रल बैंक अगले साल सोने के भंडार (Reserves) बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह बड़ी संस्थागत खरीद, शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग फ्लो से अलग, मार्केट को एक गहराई देती है। देश के अंदर, MCX पर सोना ₹1.5 लाख से ₹1.6 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर रहा है, और अगर यह अनिश्चितता बनी रही तो ₹1.61 लाख के लेवल को छू सकता है। कीमतों में आई इस तेज़ी ने ज्वेलरी सेक्टर (Jewelry Sector) के खरीदारों के व्यवहार को भी बदल दिया है। अब लोग सोने के वज़न से ज़्यादा डिज़ाइन-वाले, ज़्यादा काम आने वाले पीसेज़ और लैबोरेटरी-ग्रोन डायमंड्स (Laboratory-grown diamonds) की ओर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह बदलाव कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सोच-समझकर खरीदारी करने की प्रवृति को दिखाता है, जिसमें उपभोक्ता ज्वेलरी को निवेश और एक्सेसरी (Accessory) दोनों मानते हैं।
कीमती धातुओं का कॉम्प्लेक्स: सोना, चांदी और बाकी
सोने-चांदी के अलावा, अन्य कीमती धातुओं में भी बदलाव दिख रहे हैं। Silver, जो एक मॉनेटरी एसेट (Monetary Asset) होने के साथ-साथ इंडस्ट्रियल कमोडिटी (Industrial Commodity) भी है, अक्सर ज़्यादा वोलेटाइल (Volatile) रहती है और इसमें सौर ऊर्जा (Solar Energy) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों से डिमांड में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि Silver की कीमतें 2026 तक औसतन $81/oz रह सकती हैं, जो 2025 की बड़ी तेज़ी के बाद है। प्लैटिनम (Platinum) और पैलेडियम (Palladium) भी इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की कमी, खासकर ग्रीन टेक्नोलॉजी (Green Technology) और ऑटोमोटिव सेक्टर (Automotive Sector) में, की वजह से निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि ये धातुएं अभी भी सोने और चांदी की तुलना में कमज़ोर हैं।
बड़े जोखिम: क्या हो सकता है उलटफेर?
हालांकि, इस तेज़ी के बीच कुछ बड़े जोखिम भी छिपे हैं। अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी, भले ही जुडिशियल रिव्यू (Judicial Review) के अधीन हो, ट्रेड में摩擦 पैदा कर रही है और उपभोक्ताओं के लिए महंगाई बढ़ा सकती है। जबकि बाज़ार ने जून में फेड रेट कट की संभावना को कम कर दिया है, लेकिन अगर फेडरल रिजर्व अचानक सख्त रुख अपनाता है या डॉलर और मज़बूत होता है, तो कीमती धातुओं की यह बढ़त तुरंत रुक सकती है। खासकर Silver में स्पेकुलेटिव बाइंग (Speculative Buying) और लीवरेज्ड पोजीशन (Leveraged Positions) का बढ़ना, सेंटीमेंट (Sentiment) बदलने पर तेज़ी से गिरावट का जोखिम बढ़ाता है। इसके अलावा, व्यापक आर्थिक माहौल भी चिंता का विषय है; जीडीपी (GDP) ग्रोथ में सुधार का अनुमान है, लेकिन लगातार बनी हुई महंगाई और कमज़ोर लेबर मार्केट (Labor Market) नीति निर्माताओं के लिए एक मुश्किल पहेली है। फेड चेयर नॉमिनी (Fed Chair Nominee) के तौर पर केविन वॉर्श् (Kevin Warsh) की नियुक्ति पर बाज़ार की प्रतिक्रिया ने दिखाया कि सेंटीमेंट कितनी जल्दी बदल सकता है, जिससे अचानक बिकवाली आई क्योंकि नीति सामान्यीकरण (Policy Normalization) के डर ने जगह बनाई। यह बताता है कि कैसे राजनीतिक नियुक्तियां और पॉलिसी की उम्मीदें, सिर्फ़ फंडामेंटल इकोनॉमिक डेटा से ज़्यादा, अचानक वोलेटिलिटी पैदा कर सकती हैं।
भविष्य का नज़रिया: क्या उम्मीद करें?
इसके बावजूद, विश्लेषकों का 2026 के लिए कीमती धातुओं का नज़रिया आम तौर पर सकारात्मक बना हुआ है। जे.पी. मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च (J.P. Morgan Global Research) का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना $5,000/oz के करीब पहुंच सकता है, जिसकी मुख्य वजह लगातार बनी हुई सेंट्रल बैंक और निवेशकों की मांग है। इसी तरह, Silver के लिए भी 2026 में औसतन $81/oz का अनुमान है, जिसे इंडस्ट्रियल इस्तेमाल और सप्लाई की कमी का सहारा मिलेगा। पॉलिसी की अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंकों की लगातार बनी हुई डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रेटेजीज़ (Diversification Strategies) एक ऐसे माहौल को बनाए रखती हैं जहाँ सुरक्षित निवेश की मांग बनी रहेगी, जिससे आने वाले समय में कीमतें स्थिर रहेंगी।