बाज़ार को चौंकाने वाली तेज़ी
मंगलवार को भारतीय सर्राफा बाज़ारों में सोना और चांदी की कीमतों ने सबको चौंका दिया। जहाँ एक ओर भारत और अमेरिका व यूरोपीय संघ (EU) के बीच ट्रेड डील फाइनल होने से बाज़ार में स्थिरता की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर कीमती धातुओं में भारी उछाल देखा गया। सामान्य तौर पर, जब ट्रेड संबंधी अनिश्चितता कम होती है, तो गोल्ड और सिल्वर जैसी सेफ-हेवन एसेट्स (safe-haven assets) की मांग घट जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
कीमतों में कितना उछाल?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, चांदी की कीमतों में ₹17,531 का भारी उछाल आया, जो 7.42% की बढ़ोतरी थी। सुबह के कारोबार में यह ₹2,53,792 प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी। सोने की कीमतों में भी ₹5,110 की वृद्धि हुई, यानी 3.55% की तेज़ी देखी गई, और यह ₹1,49,101 प्रति 10 ग्राम के करीब कारोबार कर रहा था। फिजिकल मार्केट में भी यही ट्रेंड दिखा, जहाँ बड़े भारतीय शहरों में सोना करीब ₹1,49,250 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,54,830 प्रति किलो के भाव पर बिकी।
तेज़ी की असली वजह: टेक्निकल फैक्टर्स
इस अप्रत्याशित उछाल के पीछे मुख्य रूप से टेक्निकल फैक्टर्स और बाज़ार की वोलैटिलिटी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि यह तेज़ी ट्रेड डील्स के सकारात्मक प्रभाव पर हावी हो गई।
1. CME ग्रुप का कदम: CME ग्रुप द्वारा गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर मार्जिन रिक्वायरमेंट बढ़ाना इस तेज़ी का एक बड़ा कारण बना। इस कदम ने लीवरेज्ड ट्रेडर्स (leveraged traders) को अपनी पोजीशन लिक्विडेट करने पर मजबूर किया, जिससे पहले बिकवाली का दबाव बढ़ा था और अब इसी के कारण रिकवरी आ रही है।
2. यूएस मॉनेटरी पॉलिसी की अटकलें: अमेरिका के फेडरल रिजर्व में संभावित बदलाव को लेकर चल रही अटकलों ने भी बाज़ार को प्रभावित किया। खासकर, केविन वॉर्श (Kevin Warsh) जैसे 'हॉकिश' (hawkish) उम्मीदवार का नाम आने से मॉनेटरी पॉलिसी के सख्त होने और यूएस डॉलर के मजबूत होने की उम्मीद जगी। ऐतिहासिक रूप से, ये दोनों ही कारक कीमती धातुओं के लिए निगेटिव माने जाते हैं।
पहले की गिरावट और ओवरबॉट कंडीशन
यह ध्यान देने वाली बात है कि इससे पहले, इन कीमती धातुओं ने पिछले हफ्तों में जबरदस्त तेजी दिखाई थी। चांदी 60% से ज़्यादा और सोना 20% से ज़्यादा चढ़ गया था, जो ऐतिहासिक स्तरों पर पहुंच गया था। इन 'पैराबोलिक रैलियों' (parabolic rallies) के कारण बाज़ार ओवरबॉट (overbought) हो गया था, और RSI जैसे इंडिकेटर्स भी यही संकेत दे रहे थे।
पतली लिक्विडिटी (thin liquidity) के बीच, इन भारी उछालों के बाद मुनाफावसूली (profit-taking) अचानक पैनिक सेलिंग (panic selling) में बदल गई। CME ग्रुप के मार्जिन बढ़ाने के फैसले (गोल्ड के लिए 6% से 8% और सिल्वर के लिए 11% से 15%) ने ट्रेडर्स को पोजीशन छोड़ने पर मजबूर किया, जिससे कीमतों में बड़ी गिरावट आई। मंगलवार की तेज़ी इसी बिकवाली के बाद आई एक टेक्निकल रिकवरी है।
आगे की राह
इन जबरदस्त उतार-चढ़ावों के बावजूद, एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के लिए सोना और चांदी का आउटलुक अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। Ponmudi R, CEO of Enrich Money, के मुताबिक, MCX गोल्ड फ्यूचर्स स्ट्रक्चरली मजबूत बने हुए हैं और अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। सिल्वर फ्यूचर्स में इंट्राडे में बड़ी हलचल के बावजूद, लंबी अवधि का ट्रेंड मजबूत है, और कीमतों में आई गिरावट को पोजिशनल ट्रेडर्स के लिए एक्यूमुलेशन ऑपर्च्युनिटी (accumulation opportunity) के तौर पर देखा जा रहा है। भू-राजनीतिक तनाव, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और मैक्रो अनिश्चितता जैसे फंडामेंटल कारण अभी भी मौजूद हैं, जो बताते हैं कि हालिया गिरावट बाज़ार के फंडामेंटल्स में कमजोरी का संकेत नहीं है।